उत्तराखंड

पलटी मारने वाले नेताओं की अब होगी ‘भाजपा परीक्षा’, पार्टी ने बनाई राजनीतिक संहिता जिस पर उतरना पड़ेगा खरा

कांग्रेस समेत अन्य दलों से नाता तोड़कर भाजपा में शामिल हुए नेताओं को भगवामय होना होगा। पार्टी की रीति-नीति में ढालने के दृष्टिगत इन्हें संस्कारवान और क्षमतावान बनाने के लिए भाजपा ने बाकायदा राजनीतिक संहिता बनाई है। इस पर उन्हें खरा उतरना है। इन नेताओं को गले में भाजपा का पटका, सिर पर टोपी और हाथ में पार्टी का साहित्य लेकर जनता के बीच जाना है।

भाजपा ने इन सभी के लिए लोकसभा चुनाव में काम भी निर्धारित कर दिया है। ये अब गांव-गांव जाकर नुक्कड़ सभाएं तो करेंगे ही, प्रत्येक मतदाता से संपर्क साधकर केंद्र एवं राज्य सरकार की उपलब्धियों व योजनाओं की जानकारी देंगे।  भाजपा ने राज्य में लोकसभा की प्रत्येक सीट पर पांच लाख से अधिक मतों के अंतर से जीत का लक्ष्य रखा है।

इस सबके दृष्टिगत ही पार्टी ने दूसरे दलों के नेताओं और कार्यकर्ताओं के लिए अपने दरवाजे खोले हैं। अब तक दो पूर्व मंत्रियों, एक विधायक समेत आठ पूर्व विधायकों को पार्टी अपने पाले में खींच चुकी है। इसके अलावा पिछले लोकसभा व विधानसभा चुनावों में प्रत्याशी रहे और क्षेत्र विशेष में पकड़ रखने वाले दर्जनों नेताओं ने भी भाजपा का दामन थामा है।

पंचायत व निकायों के प्रतिनिधियों, विभिन्न दलों के प्रांत से लेकर जिला, ब्लाक व शहर इकाइयों के पदाधिकारी और कार्यकर्ताओं की तो लंबी फेहरिस्त है। पार्टी का दावा है कि अभी तक अन्य दलों के 15 हजार से ज्यादा लोग भाजपा की सदस्यता ग्रहण कर चुके हैं और यह सिलसिला जारी है।  अब जबकि, दूसरे दलों से बड़ी संख्या में लोग भाजपा में आए हैं तो उन्हें खाली तो बैठाया नहीं जा सकता।

भाजपा ने बनाई राजनीतिक संहिता

इसे देखते हुए ही भाजपा ने इनके लिए राजनीतिक संहिता बनाई है। प्रदेश भाजपा के सूत्रों के अनुसार जो भी लोग भाजपा में आए हैं, उन्हें पार्टी की रीति-नीति में ढलने के दृष्टिगत भाजपा का साहित्य पढऩे को दिया गया है। यह सुनिश्चित किया जाएगा कि ये नेता अथवा कार्यकर्ता जब भी जनता के बीच जाएं तो उनके गले में कमल के फूल वाला भाजपा का पटका, सिर पर टोपी और हाथ में पार्टी का साहित्य यानी केंद्र एवं राज्य सरकारों की उपलब्धियों की जानकारी देने वाली पुस्तकें अवश्य हों।

एक-दो दिन के भीतर भाजपा में शामिल हुए प्रमुख नेताओं व कार्यकर्ताओं के साथ वर्चुअल बैठक होगी, जिसमें उन्हें लोकसभा चुनाव के दृष्टिगत कार्य दिए जाएंगे। तय किया गया गया है कि ये सभी गांव-गांव जाकर ज्यादा से ज्यादा नुक्कड़ सभाएं करेंगे। मतदाताओं से संपर्क कर उन्हें केंद्र एवं राज्य सरकार की उपलब्धियों व योजनाओं से संबंधित साहित्य वितरित करेंगे। साथ ही यह भी बताएंगे कि पिछले 10 वर्षों में राज्य ने किस प्रकार प्रत्येक क्षेत्र में नए प्रतिमान गढ़े हैं।

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