उत्तराखंड

हरिद्वार-गढ़वाल संसदीय सीटों पर जीत के बाद भी BJP को क्यों टेंशन? लोकसभा चुनाव के बाद इस बात से परेशान

लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने भले ही पांचों की पांच सीटें अपने नाम कर ली हो, लेकिन इसके बावजूद भी पार्टी को टेंशन हो रही है। हरिद्वार और गढ़वाल संसदीय सीटों में जीत के बाद भी बीजेपी जीत के कम अंतर पर मंथन करने का प्लान बनाया है।

 भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने कहा है कि गढ़वाल और हरिद्वार सीट पर नए प्रत्याशी होने के कारण पार्टी की जीत का अंतर कम रहा। उन्होंने यह भी कहा कि दोनों ही नवनिर्वाचित सांसद पार्टी के वरिष्ठ नेता हैं और अगले पांच साल में उनका अपने क्षेत्र में लोगों से अच्छा संपर्क हो जाएगा।

उसके बाद भविष्य के लोकसभा चुनाव में दोनों सीटों को वे बड़े अंतर से जीतेंगे। भट्ट ने भाजपा के प्रदेश मुख्यालय में गुरुवार को मीडिया से बातचीत में यह दावा किया। भट्ट से पूछा गया था कि उत्तराखंड में बाकी तीन सीटों के मुकाबले इन दो सीटों पर जीत का अंतर कम क्यों रहा?

इस पर उन्होंने कहा- इन सीटों पर पार्टी ने नए प्रत्याशी उतारे थे इसलिए जीत का अंतर कुछ कम रहा। मीडियाकर्मियों के यह कहने पर कि जिन दो नेताओं को आप नया कह रहे हैं, वे राज्यसभा सदस्य और सीएम रहे हैं। भट्ट ने सफाई दी-वे छोटे नेता नहीं हैं, लोकसभा चुनाव पहली बार लड़े।

मंडल अध्यक्ष से सांसद तक की समीक्षा होगी भाजपा

भट्ट ने कहा कि लोकसभा चुनाव में पार्टी राज्य की 10 विधानसभा सीटों पर पीछे रही है। इन सीटों की अलग से समीक्षा होगी। साथ पार्टी लोकसभा चुनाव में मिले मतों की बूथवार समीक्षा के लिए कमेटी बनाएगी। कमेटी हर सीट की समीक्षा करेगी।

इस दौरान सांसद, मंत्री, विधायक से लेकर पार्टी पदाधिकारियों तक का प्रदर्शन देखा जाएगा। खराब प्रदर्शन करने वालों को चिह्नित कर निर्णय लिया जाएगा। समीक्षा के बाद ऐसे बूथ अध्यक्षों को सम्मानित करेंगे जहां लोकसभा चुनाव में पार्टी को 90 से ज्यादा मत मिले।

साथ ही ऐसे विधायक भी सम्मानित किए जाएंगे जो अपने क्षेत्र में 70 से अधिक मत हासिल करने में सफल रहे हैं। भट्ट बोले-अब सरकार व संगठन में बूथ पर अच्छा प्रदर्शन करने वालों को ही अहम जिम्मेदारियां मिलेंगी।

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