उत्तराखंड

दून मेडिकल कॉलेज में पीजी सीटों पर झटका, 30 लाख हो गए जब्त, ये रही लापरवाही…

दून मेडिकल कॉलेज में तीन विषयों में पीजी एवं एक में एमसीएच की सीटों पर झटका लगा है। एनएमसी ने इन चारों विभाग में 20 सीटों के लिए आवेदन फैकल्टी की कमी बताकर खारिज कर दिए हैं। वहीं आवेदन शुल्क के रूप में जमा 30 लाख रुपये की धनराशि भी जब्त हो गई है। फैकल्टी के कम वेतन एवं विभागों की लापरवाही वजह बताई गई है।

एनएमसी के मेडिकल असेसमेंट एंड रेटिंग बोर्ड (एमआरबी) की ओर से चारों विभागों के लेटर ऑफ डिसअप्रूवल कॉलेज को भेज दिए गए हैं। एनएमसी ने एक जनवरी से 29 फरवरी 2024 तक एबास पर फैकल्टी की उपस्थिति मानकों के आधार पर असेसमेंट किया। फैकल्टी की कमी पर चारों के आवेदन खारिज कर दिए। बोर्ड की ओर से भेजे पत्रों के मुताबिक पैथोलॉजी विभाग में दो से नौ सीटें करने का प्रस्ताव था, विभाग में दो प्रोफेसर, एक एसोसिएट प्रोफेसर, चार असिस्टेंट प्रोफेसर मिले, एसोसिएट प्रोफेसर की यहां कमी रही।

वहीं, पैथोलॉजी जांचें 75 प्रतिशत बेड ऑक्यूपेंसी पर होनी चाहिए थी, वह 66 प्रतिशत ही मिली। बाल रोग विभाग में सात सीटों के लिए प्रोफेसर कोई नहीं, एसोसिएट प्रोफेसर दो और असिस्टेंट प्रोफेसर पांच मिले। प्रोफेसर की कमी पर पीजी की सीटें नहीं मिली। पिछले साल भी लापरवाही से आवेदन नहीं हो सका था। एमएस के विभाग टीबी चेस्ट में तीन सीटों के लिए एक प्रोफेसर, एसोसिएट कोई नहीं, असिस्टेंट प्रोफेसर कोई नहीं है। यूनिट पूरी नहीं होने के चलते मान्यता नहीं मिली। यूरोलॉजी में एमसीएच की तीन सीटों के लिए एक प्रोफेसर, एसोसिएट कोई नहीं, एक असिस्टेंट प्रोफेसर मिले। यहां भी यूनिट पूरी नहीं होने से पीजी सीटें छिटक गई।

मरीजों को परेशानी, युवाओं को निराशा

बाल रोग विभाग, यूरोलॉजी एवं टीबी चेस्ट में अव्यवस्थाओं, फैकल्टी, जेआर की कमी के चलते मरीजों को इलाज में परेशानी झेलनी पड़ रही है। टीबी चेस्ट में ओपीडी, वार्ड एमएस के अलावा जेआर संभालते हैं। पीडिया में फैकल्टी को वार्डों में आठ घंटे ड्यूटी करनी पड़ रही है। पीजी का इंतजार कर रहे युवाओं को निराशा हाथ लगी है।

कॉलेज में नेशनल मेडिकल कमीशन ने 20 विभागों में फैकल्टी की कमी बताई है। पिछले दिनों हुई सुनवाई में एनएमसी ने कड़ी नाराजगी जता एमबीबीएस सीटें घटाने की चेतावनी दी और दो माह में सुधार की हिदायत दी है। यहां एमबीबीएस की 150 सीटें हैं।

पैथोलॉजी एवं बाल रोग विभाग में फैकल्टी पूरी है। दो माह के असेसमेंट के दौरान कुछ प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर कुछ दिनों की छुट्टी पर थे। छुट्टी को भी अनुपस्थिति दिखा फैकल्टी की कमी बताई है। दोनों विभागों से प्रत्यावेदन भेज अपील की जा रही है। यूरो-टीबी चेस्ट में कमी बनी है। आचार संहिता के बाद इंटरव्यू होंगे। डॉ. आशुतोष सयाना, प्राचार्य

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