लोकतंत्र के महापर्व लोस चुनाव में प्रत्याशी तो जीत के लिए जीजान से लगे ही हैं, लेकिन हरिद्वार लोस सीट पर तीन पूर्व मुख्यमंत्रियों की प्रतिष्ठा भी दांव पर लगी हुई है, क्योंकि कोई चुनावी मैदान में खुद डटे हैं तो किसी के कंधों पर चुनाव जिताने की जिम्मेदारी है। इसलिए हरिद्वार का चुनावी समर तीनों पूर्व सीएम का राजनीतिक भविष्य भी तय करेगा।
लंबे समय के बाद उन्हें यह अवसर मिला है और उनका प्रदर्शन उनकी भविष्य की राजनीति की दिशा तय करेगा।पूर्व सीएम हरीश रावत का राजनीतिक भविष्य भी बेटे वीरेंद्र रावत के प्रदर्शन पर टिका है। इससे ही पूर्व सीएम रावत का कांग्रेस में राजनीतिक कद तय होगा। ऐसे में तीनों सीएम जीतने और जिताने के लिए चुनाव में खूब पसीना बहा रहे हैं। हालांकि, अब देखना होगा कि कौन से पूर्व सीएम की किस्मत इस लोस चुनाव में खुलती है।