देहरादून। लोक निर्माण विभाग (PWD) की सड़कों की स्थिति और अधिकारियों द्वारा किए जा रहे निरीक्षणों की वास्तविक उपयोगिता को लेकर सवाल उठने लगे हैं। सवाल यह है कि यदि सुबह-सुबह उच्च अधिकारी सड़कों का निरीक्षण कर रहे हैं, तो उसका असर धरातल पर क्यों दिखाई नहीं देता ? निरीक्षण के बाद भी यदि सड़कें बदहाल रहती हैं, तो ऐसे निरीक्षणों का आम जनता को आखिर क्या लाभ मिल रहा है ?
PWD के इंजीनियरों और संबंधित अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा गया है कि केवल निरीक्षण करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि निरीक्षण के बाद समयबद्ध कार्रवाई और सड़क की स्थिति में स्थायी सुधार सुनिश्चित करना भी जरूरी है। यदि निरीक्षण केवल फोटो खिंचवाने और मीडिया में सुर्खियां बटोरने तक सीमित रह जाए, तो उसका उद्देश्य ही अधूरा रह जाता है।
चुनाव से पहले सड़क सुधार नहीं हुआ तो सरकार के लिए बन सकती है चुनौती
सड़क जैसी बुनियादी सुविधा का सीधा संबंध आम नागरिकों की सुरक्षा, आवागमन और रोजमर्रा की जिंदगी से है। यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो आशंका है कि चुनाव आने तक भी सड़कों की स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं हो पाएगा। ऐसी स्थिति भाजपा सरकार के लिए राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर असहज स्थिति पैदा कर सकती है तथा मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी की सरकार की कार्यप्रणाली और छवि पर भी सवाल खड़े कर सकती है।
क्या अधिकारियों की लापरवाही से सरकार की छवि को नुकसान पहुंच रहा है ?
एक महत्वपूर्ण सवाल यह भी है कि यदि सरकार सड़क सुधार को लेकर गंभीर है, तो संबंधित विभागों के स्तर पर अपेक्षित परिणाम क्यों नहीं दिखाई दे रहे हैं? क्या मुख्यमंत्री तक जमीनी समस्याओं और निरीक्षण के बाद की वास्तविक स्थिति की पूरी जानकारी पहुंच रही है? यदि शासन की मंशा जनहित में काम करने की है, तो प्रशासनिक स्तर पर ऐसी कमियां क्यों बनी हुई हैं, जिनसे सरकार की छवि प्रभावित हो सकती है ?
सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों की जिम्मेदारी केवल निरीक्षण करना या रिपोर्ट तैयार करना नहीं, बल्कि समस्याओं का प्रभावी समाधान सुनिश्चित करना भी है। यदि कहीं लापरवाही, जवाबदेही की कमी या कार्यों में अनावश्यक देरी है, तो उसकी समीक्षा कर जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए।
निरीक्षण के बाद कार्रवाई की सार्वजनिक समीक्षा हो
सड़क सुधार के लिए जरूरी है कि प्रत्येक निरीक्षण के बाद संबंधित सड़क की स्थिति, मरम्मत की आवश्यकता, जिम्मेदार अधिकारी, निर्धारित समयसीमा और कार्य पूरा होने की स्थिति का रिकॉर्ड रखा जाए। जहां सड़क निर्माण या मरम्मत का काम कराया गया है, वहां उसकी गुणवत्ता की जांच भी होनी चाहिए। केवल निरीक्षण की तस्वीरें जारी करने के बजाय कार्रवाई और सुधार के वास्तविक परिणाम जनता के सामने रखे जाने चाहिए।
सरकार और PWD के वरिष्ठ अधिकारियों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि सड़क संबंधी शिकायतों का निस्तारण केवल कागजों पर न हो, बल्कि नागरिकों को उसका प्रत्यक्ष लाभ मिले।
जनता की मांग: दिखावा नहीं, जवाबदेही और परिणाम
सड़क निरीक्षण तभी सार्थक माना जाएगा, जब उसके बाद गड्ढे भरें, क्षतिग्रस्त सड़कें दुरुस्त हों, निर्माण की गुणवत्ता सुधरे और लोगों को सुरक्षित आवागमन की सुविधा मिले। इसके लिए नियमित निगरानी, समयबद्ध मरम्मत, गुणवत्ता परीक्षण और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही आवश्यक है।
मुख्य संदेश: सरकार की छवि केवल घोषणाओं और निरीक्षणों से नहीं, बल्कि जनता को मिलने वाली सुविधाओं से बनती है। यदि सड़कें बदहाल हैं, तो निरीक्षण की तस्वीरों से समस्या का समाधान नहीं होगा। जरूरत ऐसी कार्रवाई की है, जिसका असर सड़क पर दिखाई दे और जिसका लाभ आम जनता को मिले।
जनता को दिखावा नहीं, अच्छी सड़क चाहिए; प्रचार नहीं, परिणाम चाहिए।
