भ्रष्टाचार और जीरो टालरेंस वाली सरकार में आये दिन ऐसे ही चमत्कार देखने को यदा कदा देखने को मिलते ही रहते हैं और वह कहावतें भी चरितार्थ होती ही दिखाई पडती है कि, “लोहे को लोहा ही काटता है और जहर को जहर ही मारता है” शायद इसी बजह से धाखड व धुरंदर वर्तमान सरकार ने दूध की रखवाली बिल्ली से कराने का मन बना रखा है। ऐसा ही एक हैरत अंगेज खबर प्रकाश में आई है जिसे देख कर इस जुगल जोडी की पहले ऊर्जा निगमों की मार पर मार से त्रस्त थी और अब रेरा का क्या हाल करेंगें ये जल बिन मछली की तरह बिना कुर्सी के तडपती ये जोडी?
ज्ञात हो कि गत दिवस रेरा प्राधिकरण में ऊर्जा निगम के एमडी रहे को कार्यालय ज्ञाप संख्या 402 व 403 से क्रमशः रेरा में अध्यक्ष व सदस्य के पद पर 65 वर्ष की आयु तक के लिए नियुक्ति दे दी गयी।

विशेषज्ञों की अगर यहाँ माने ये नियुक्ति सारे नियम, कानून को बलाए ताक रख कर ही की जा सकती है अपितु भू सम्पदा विनियामक अधिनियम 2016 की धारा 22 के अन्तर्गत दोनो नियुक्तियाँ सम्भव ही नहीं है, फिर ऐसे में इन नियुक्तियों पर सबाल उठना लाजमी है!
चर्चा तो यहाँ तक भी है जो स्वयं ही नामी- बेनामी अकूत सम्पत्तियों के मालिक व अनेकों भ्रष्टाचार व घोटालों में संलिप्त रहे हैं वे अब सिविल जज के समान वाली कुर्सी पर बैठ कर कैसे रेरा को सम्भालेंगे?
यहाँ यह भी उल्लेखनीय है कि पदों पर रहते हुये इस जोडी के द्वारा इकठ्ठा की गयीं अकूत सम्पत्तियों पर विजीलेंस के द्वारा अपनी जाँच रिपोर्ट भी 2024-25 में शासन को प्रेषित की जा चुकी है तथा एक पूर्व मुख्य सचिव के द्वारा भी इन महान हस्तियों के कारनामों की खुली जाँच के भी आदेश किये जा चुके हैं यही नहीं अनेकों आईएएस भी इनके काले कारनामों पर टिप्पणी कर चुके हैं फिर भी न जाने वह कौन सी वाशिंग मशीन या डिटर्जेंट हैं जिसे पूरी काली चादर उजली हो गयी?
उत्तराखंड की जनता का तो अब यह मानना है कि वर्तमान सरकार में सब कुछ सम्भव है और जो न हो जाए वह थोडा ही है। वल्कि साफ शब्दों में कहा जाए कि यहाँ साईलेंट डिक्टेटरशिप है कोई अतिश्योक्ति न होगी!
देखना यहाँ गौर तलव होगा कि धाखड व धुरंदर सरकार इन नियुक्तियों पर रेरा हित और जनहित में कोई कदम उठाती है और पुर्न विचार करती है या उसके पास इनसे योग्य और लायक तथा पाक साफ छवि वाली प्रतिभाओं का टोटा है?
