देवभूमि उत्तराखंड के ऊर्जा विभाग में एकाएक दिग्गजों को हटाए जाने को लेकर तरह तरह की चर्चाओं का बाजार गर्म है।
ज्ञात हो कि यूपीसीएल और यूजेवीएनएल में सेवानिवृत्त के बाद भी कुडली मारे बैठे प्रबंध निदेशक अनिल कुमार व निदेशक परियोजना अजय अग्रवाल सहित उत्तराखंड जल विद्युत निगम के एमडी संदीप सिंघल को तत्काल प्रभाव से पद मुक्त किए जाने और जी एस बुदियाल को यूपीसीएल का एमडी व अजय कुमार सिंह को एमडी जल विद्युत निगम का दायित्व सौंपे जाने के आदेश जारी होने से धाखड धामी सरकार का नायाब और सराहनिए कदम बताया जा रहा है देर आए दुरुस्त आए तो सही।
ज्ञात हो कि पिटकुल के प्रभारी एमडी पीसी ध्यानी को विगत 26 फरवरी को उच्च न्यायालय के आदेश के क्रम में पदमुक्त किया जा चुका है और उनकी जगह पर आईएएस मेहरबान सिंह बिष्ट अपर सचिव ऊर्जा को एमडी का जिम्मा सौंपा जा चुका है तथा पीसी ध्यानी अब निदेशक (मानव संसाधन) पिटकुल का ही दायित्व सम्भाले हुए हैं।
सूत्रों की अगर यँहा माने तो सेवा निवृत्ति के बाद इस एक्सटेंशन के खेला के पीछे जंहा एक ओर अभियंताओं की नाराजगी और उनका विरोध पनप रहा था वहीं दूसरी ओर अनेकों भृष्टाचारों व आय से अधिक अथाह नामी और बेनामी सम्पत्तियों के मामलों में संलिप्त तथा शासन के द्वारा इन्हें विजीलेंस जाँच में दोषी पाये जाने के बाबजूद भी 2024 में निक्षेपित कर दो-दो साल का एक्सटेंशन दिया जाना भी कम हैरत अंगेज नहीं रहा है।
यूपीसीएल में करोंडो करोडों के घोटालों की लिस्ट भी निरंतर लम्बी होती जा रही थी फिर चाहे वे घोटाले आरडीएसएस स्कीम के हों या फिर अपने चहेतों को ही ऐन केन प्रकरेण टेण्डर दिये जाने के मामले तथा देवभूमि केदारनाथ में छः सात करोड में बनने वाला बिजलीघर सौ डेढ सौ करोड में बनबाये जाने के टेण्डर घोटिला हो या फिर टाटा पावर और पल्स पावर से हाईड्रो पावर की 500 मेगावाट बिजली को 5.85 में चार साल का अनुबंध कर खरीद घोटाला हो। इतनी मँहगी हाईड्रो पावर खरीदे जाने से उपभोक्ताओं पर मंहगी दर थोपने की फिराक में यूपीसीएल और इन पावर सप्लारों ने 17 दिस्मवर 2025 को एक संयुक्त पिटीशन के माध्यम से आँखे मूंदे बैठे नियामक आयोग से आदेश हासिल करने में सफलता प्राप्त कर ली है। इस मंहगी बिजली खरीद और चार चार साल के अनुबंध से नियामक आयोग पर भी टैरिफ को लेकर जनसुनवाई में ढोंग का आरोप भी लग चुका है क्यों कि एक ओर नियामक आयोग टैरिफ पर जनसुनवाई कर रहा है और वहीं स्वयं काफी मँहगी बिजली खरीद की साँठगाँ भरी याचिका को रद्द न कर अनुमति प्रदान कर रहा है जिसका सीधा असर उपभोक्ताओं पर दरों में वेतहाशा वृद्धि से पड सकता है?
उल्लेखनीय यह नहीं कि घोटिलों के बादशाहों से ऊर्जा निगमों को मुक्ति मिली है। यह तो एक ट्रेलर मात्र है पिक्चर तो अभी बाकी है। स्मरण दिलाना यहाँ उचित होगा कि ये तीनों ऐसे महारथी थे जो अपने आपको दत्तक पु्त्र समझने लगे थे फिर चाहे सत्ता हो या विपक्ष, शासन हो या नेता व गोदी मीडिया सभी को चाँदी के चम्मच से दूध पिलाते देखे जाते और इशारों पर नचाते देखे जाते रहे हैं। यही नहीं इनकी नियुक्तियों के पीछे की कहानियाँ भी जग जाहिर रही हैं।
उल्लेखनीय तो तब होगा जब धाकड धामी 5 रु 85 पैसे की कीमत पर साँठगाँठ से खरीदी जाने वाली का टेण्डर निरस्त कर ऊर्जा प्रदेश की जनता को सस्ती बिजली मुहैया करायेगें!
अब हाँलाकि ऊर्जा के इन तीनों निगमों में एमडी और निदेशकों की नियुक्तियों की प्रक्रिया परवान चढ चुकी है वशर्ते उस पर पूर्व की भाँति कोई ग्रहण न लगे! वैसे नियुक्ति मापदंडों में हाल ही में किये गये बदलाव भी किन्हीं व्यक्ति विशेष को लाभ पँहुचाने और सेहरा बाँधने के ख्याल से किया जाना भी खासी चर्चा में है?
देखना अब यहाँ गौर तलब होगा कि घोटालों के इन बादशाहों पर इतनी ही गाज पर्याप्त होगी या फिर इनकी आय से अधिक अथाह नामी और बेनामी सम्पत्तियों पर भी कडा एक्शन होगा और काली कमाई व टेण्डर घोटालों पर भी कोई काबिले तारीफ कदम उठाया जायेगा?
क्या धाकड धामी इन घोटालेबाजों पर शिकंजा कसेगें और जनधन की वसूली तथा निगमों की हालत बद से बदतर किये जाने की सजा दिलाने की दिशा में कोई धाकड ऐक्शन लेंगे और इनकी अकूत सम्पत्तियों को जब्त करेंगे?
17 मार्च को जारी आदेशों को देखिए –





