उत्तराखंड प्रदेश के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सभी जिलाधिकारियों को बीते 3 सालों में बने स्थायी निवास प्रमाण पत्र की जांच के आदेश दिए हैं. उत्तराखंड की मुख्य विपक्षी पार्टी ने मुख्यमंत्री के इस फैसले पर कुछ सवाल उठाते हुए भाजपा सरकार को घेरा है.
उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने कहा कि राज्य में स्थायी निवास प्रमाण पत्र बनाकर और नियमों की अनदेखी करके उत्तराखंड के निवासियों के हकों पर डाका डालने का काम किया गया है. कांग्रेस पार्टी लंबे समय से तय नियमों की अनदेखी करके बनाये जा रहे स्थायी निवास प्रमाण पत्रों पर रोक लगाने की मांग उठाती आ रही थी. कांग्रेस पार्टी पहले से ही इस मामले की जांच की मांग कर रही थी.
अब यह जानकारी सामने आई है कि मुख्यमंत्री ने पिछले तीन सालों में बने स्थायी निवास प्रमाण पत्रों की जांच के आदेश दिए हैं. उन्होंने कहा कि हमारी यह बात मुख्यमंत्री को पुख्ता लगी है और इसके पुख्ता प्रमाण भी हैं कि लोगों ने गलत किया है. उन्होंने आरोप लगाया कि इस सबके लिए सरकार दोषी है, क्योंकि सरकार ने नियमों में शिथिलता बरतते हुए इस प्रकार के प्रमाण पत्र बनाने का मार्ग प्रशस्त किया.
गणेश गोदियाल ने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को इसका जवाब भी देना चाहिए कि पिछले साढ़े आठ सालों से उत्तराखंड में भाजपा सरकार सत्ता में है, और इन सालों से सत्तासीन धामी सरकार के समय यह कब हुआ कि जब स्थायी निवास के नियमों में ढील दी गई. गोदियाल ने कहा कि दरअसल मुख्यमंत्री अपनी खाल बचाने के लिए अधिकारियों पर दोष मड़ रहे हैं. इसके लिए अगर अधिकारी दोषी हैं तो उन्हें जरूर दंड मिलना चाहिए, लेकिन भाजपा संगठन और मुख्यमंत्री धामी को इस कृत्य से अलग नहीं किया जा सकता है, इसलिए इस कृत्य में यह भी बराबर के भागीदार हैं.
कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने कहा कि इस कृत्य के लिए कांग्रेस पार्टी बीते 2 सालों से लगातार कहती आ रही थी. यहां के नागरिकों के हकों पर डाका डालने के लिए सरकार ने स्थायी निवास प्रमाण पत्रों के नियमों में ढील दे दी है. उस प्रकरण में भले ही धामी ने अधिकारियों को दंड देने की बात जरूर की है, लेकिन आने वाले समय में प्रदेश की जनता भाजपा सरकार को दंडित करने की तैयारी कर चुकी है.