उत्तराखंड में अवस्थापना विकास, पर्यटन-तीर्थाटन, बुनियादी सुविधाओं को दूरदराज ग्रामीण क्षेत्रों तक पहुंचाने की उम्मीदों को डबल इंजन से तेज गति मिलने जा रही है। 16वें वित्त आयोग की संस्तुति के आधार पर वित्तीय वर्ष 2026-27 में केंद्रीय करों में राज्य की हिस्सेदारी के रूप में 17,414.57 करोड़ रुपये राज्य की झोली में गिरेंगे।
पूंजीगत निवेश योजना, जल जीवन मिशन की लंबित परियोजना धनराशि के साथ ही केंद्रीय योजनाओं को मिले प्रोत्साहन को सम्मिलित किया जाए तो राज्य को लगभग 24 हजार करोड़ की प्राप्ति होगी। वित्तीय वर्ष 2025-26 की तुलना में नए वित्तीय वर्ष में नौ हजार करोड़ से अधिक राशि अतिरिक्त मिलने का रास्ता साफ हुआ है। इस सबके बीच राज्य को झटका भी लगा है। 16वें वित्त आयोग ने राजस्व घाटा अनुदान की राह रोक दी है।
उत्तराखंड के लिए वित्तीय वर्ष 2026-27 का केंद्रीय बजट नई उमंग जगाने वाला है। केंद्र सरकार ने 16वें वित्त आयोग की संस्तुतियों को भी स्वीकृति दी है। इन संस्तुतियों के आधार पर नए वित्तीय वर्ष में राज्य को केंद्रीय करों में राज्य की हिस्सेदारी के रूप में वर्ष 2025-26 की तुलना में 1841.16 करोड़ रुपये अतिरिक्त मिलेंगे।
आयोग ने अगले पांच वर्षों के लिए शहरी और ग्रामीण निकायों के लिए अनुदान राशि में बड़ी वृद्धि की है। 15वें वित्त आयोग की तुलना में 3160 करोड़ रुपये इन निकायों को अधिक मिलेंगे। प्रतिवर्ष करीब 620 करोड़ रुपये की यह अधिक राशि शहरी निकायों और पंचायतों को संसाधन जुटाने में सहायक होगी।
इसी प्रकार आपदा प्रबंधन मद में पांच वर्षों में 5504 करोड़ रुपये देने की संस्तुति आयोग ने की है। इनमें केंद्रांश 4953.60 करोड़ है। इस तरह प्रति वर्ष केंद्र से 990 करोड़ राज्य को मिलने हैं। आयोग ने राजस्व घाटा अनुदान देने से राज्यों को मना किया है। इससे राज्य को बड़ा नुकसान तय है।
15वें वित्त आयोग ने वर्ष 2021-26 की अवधि में राज्य को राजस्व घाटा अनुदान के रूप में 28,147 करोड़ की राशि दी। अब यह बड़ी राशि राज्य को नहीं मिल पाएगी। आपदा प्रबंधन की राशि में भी पिछली बार की तुलना में 4.33 प्रतिशत की कमी की गई है।
