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युवा कांग्रेस ने शांति सभा कर सीएए का किया विरोध

देहरादून,युवा कांग्रेस ने नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) और एनआरसी के विरोध में गांधी पार्क में शांति सभा का आयोजन किया। सभा का नाम संविधान बचाओ दिया गया। सभा में युकां के वक्ताओं ने केंद्र की मोदी सरकार का पुरजोर विरोध किया।

युवा कांग्रेस ने आरोप लगाया कि सीएए धर्म के आधार पर लोगों को बांटता है। जो हमारे संविधान की मूल धारणा के खिलाफ है। यह कानून केंद्र सरकार ने केवल अपना वोट बैंक बढ़ाने के लिए लागू किया है। इससे मोदी सरकार के खिलाफ पूरे देश के अल्पसंख्यकों में रोष है।

युवा कांग्रेस के नेताओं ने लोगों से अपील की कि शांतिपूर्ण तरीके से सीएए और एनआरसी का विरोध करें। वक्ताओं ने यह भी कहा कि सरकार बेकसूर लोगों पर मुकदमे दर्जकर बदले की भावना से काम कर रही है। सीएए में बदलाव नहीं किया गया तो युवा कांग्रेस देहरादून के साथ पूरे प्रदेश में हो रहे आंदोलनों में प्रतिभाग करेगी। जिसकी पूरी जिम्मेदारी केंद्र सरकार की होगी।

इस अवसर पर युवा कांग्रेस के जिला अध्यक्ष भूपेंद्र नेगी, प्रदेश महासचिव संदीप चमोली, विजय रतूड़ी, गौतम सोनकर, अजय रावत, पौड़ी विधानसभा उपाध्यक्ष आशीष सक्सेना, अमनदीप सिंह बत्रा, हेमंत उप्रेती, रोहित कुमार, पवन चंडोक, हरेंद्र, शिवम कुमार आदि मौजूद रहे।

नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) के विरोध में गांधी पार्क पहुंचे विभिन्न संगठनों को पुलिस ने प्रदर्शन नहीं करने दिया। पुलिस ने पदाधिकारियों से पोस्टर भी छीन लिए। इसके बाद वह गांधी पार्क में ही शांतिपूर्ण ढंग से बैठक करने लगे। पुलिस के मुताबिक संगठनों ने प्रदर्शन करने की इजाजत नहीं ली थी, इसलिए उन्हें रोका गया।

पीपुल्स फोरम उत्तराखंड के संयोजक जयकृत कंडवाल ने बताया कि वह सीएए का विरोध जताने गांधी पार्क पहुंचे थे, लेकिन पुलिस ने उन्हें रोक दिया। जबकि कुछ समय बाद दूसरा संगठन गांधी पार्क के सामने नारेबाजी करते देखा गया। कंडवाल के मुताबिक पुलिस धारा 144 लागू होने की बात कह रही है, जबकि वह धरना देने के लिए नहीं सिर्फ विरोध जताने पहुंचे थे।

उन्होंने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए 25 दिसंबर को पार्क के बाहर विरोध प्रदर्शन करने की बात कही है। इस दौरान एसएफआइ से हिमांशु चौहान, नितिन मलेठा, आइएएस अधिकारी रिटायर्ड विभा पुरी आदि भी मौजूद रहे।

वहीं, सीओ सिटी शेखर सिंह जुयाल ने कहा कि लोग बिना अनुमति के प्रदर्शन करने पहुंचे थे। यदि उन्हें विरोध जताना है तो अनुमति लेकर आना चाहिए था। बिना अनुमति किसी को भी प्रदर्शन करने की इजाजत नहीं दी जाएगी।

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