उम्मीदें

होम स्टे योजना से लगे स्वरोजगार को पंख, दुर्गम इलाकों में भी पर्यटकों को मिल रही सेवा

पिथौरागढ़. उत्तराखंड के पर्वतीय जिलों में होम स्टे (Home Stay in Pithoragarh) से जुड़कर यहां के स्थानीय युवा स्वरोजगार को अपनाने के साथ ही पर्यटकों को उचित सेवा भी दे रहे हैं, जिससे उत्तराखंड के दुर्गम इलाकों के लोगों की आजीविका में सुधार आया है. सीजन में स्थानीय लोग अच्छा रोजगार कर रहे हैं. युवाओं को स्वरोजगार से जोड़ने और पहाड़ के गांवों से हो रहे पलायन को थामने के लिए उत्तराखंड सरकार द्वारा होम स्टे योजना की शुरुआत की गई थी. इसके तहत पर्यटन स्थलों पर स्थानीय लोग अपने ही घरों में देश-विदेश के पर्यटकों के लिए ग्रामीण परिवेश में साफ व किफायती आवास सुविधा उपलब्ध करा सकते हैं. इन होम स्टे में पर्यटकों को स्थानीय व्यंजन परोसने के साथ ही उन्हें यहां की सभ्यता व संस्कृति से भी परिचित कराया जा रहा है, जो पर्यटक खूब पसंद कर रहे हैं.

होम स्टे योजना की अब तक की तस्वीर देखें तो साल 2018-19 में प्रदेश के सभी जिलों में 965 होम स्टे पंजीकृत हुए. आर्थिक सर्वेक्षण के अनुसार, वर्ष 2021-22 में यह आंकड़ा बढ़कर 3964 पहुंच गया. पर्वतीय जिलों में भी यह आंकड़ा बढ़ा है. बात करें पिथौरागढ़ जिले की तो अभी तक 608 लोगों ने अपने घरों को होम स्टे में बदलने के लिए पर्यटन विभाग में पंजीकृत किया है, जिसमें सबसे ज्यादा धारचूला में 423 लोग अपना पंजीकरण करा चुके है.

सीमांत जिले का उच्च हिमालयी क्षेत्र है धारचूला
धारचूला सीमांत जिले का उच्च हिमालयी क्षेत्र भी है, जहां की खूबसूरती का दीदार करने पर्यटक पहुंच रहे हैं. पर्यटकों के ठहरने की सुविधा यहां के गांवों में होम स्टे के तौर पर विकसित हो रही है. होम स्टे में पंजीकरण करा चुके लोगों ने इसे पहाड़ के लिए फायदेमंद बताया है.

युवा नहीं ले पा रहे होम स्टे योजना का लाभ
वहीं, पहाड़ के युवाओं की एक पीड़ा यह भी है कि सरकार द्वारा होम स्टे निर्माण के लिए लोन तो दिया जा रहा है, लेकिन बेरोजगार युवा इसका लाभ नहीं ले पा रहे हैं. दरअसल युवा वर्ग लोन की किश्त चुकाने के भय से इस योजना से मजबूरन काफी दूर है. यही वजह भी है कि सरकार द्वारा दिए जा रहे लोन का लाभ अभी तक मात्र 50 लोग ही जिले में ले पाए हैं. इनमें से ज्यादातर वह लोग हैं, जिनके पास रोजगार के अन्य साधन भी मौजूद हैं. स्वरोजगार शुरू करने की चाह रखने वाले युवाओं को इस योजना से भी हताशा ही मिली है.

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