उत्तराखंड

क्यों नौकुचियाताल झील में अचानक मरने लगीं मछलियां क्यों नौकुचियाताल झील में अचानक मरने लगीं मछलियां ?

नैनीताल झील का नैसर्गिक सौंदर्य दुनियाभर के पर्यटकों को अपनी ओर खींच लाता है। पहाड़ और जंगलों से होकर गुजरते रास्तों के बीच से निकलकर यहां पहुंचने का रोमांच ही कुछ और होता है। नैनी झील के अलावा भी यहां अन्य झीले हैं जो किसी न किसी रूप में अपनी अलग पहचान के कारण जानी जाती हैं। इन्हीं में एक झील भीमताल के करीब नौकुचियाताल में है, जो अब उपेक्षा की शिकार है। झील की मछलियां आक्सीन की कमी के कारण मर रही हैं। जबकि जबकि झील में आक्सीजन के स्तर को बनाए रखने के लिए 12 करोड़ की लागत से एरिएशन प्लांट लगाया गया है। लेकिन वर्तमान में वह ठप पड़ा है।

भीमताल के समीप नौकुचियाताल झील में आक्सीजन की कमी और ठंड के कारण दर्जनों मछलियां मर कर सतह पर आ गई हैं। गुरुवार सुबह जब स्थानीय लोगों ने यह नजारा देखा तो मामले की जानकारी जिला प्रशासन और सिंचाई विभाग को दी। जिला पंचायत सदस्य अनिल चनौतिया ने बताया कि पूर्व में शासन की ओर से यहां पानी में आक्सीजन की मात्रा को बढ़ाने के लिए 12 करोड़ की लागत से एरिएशन प्लांट लगाया गया था। जिससे जाड़ों में झील में आक्सीजन की मात्रा बनी रहती थी।

दो वर्ष से एरिएशन प्लांट के बंद हो जाने से पानी दूषित होने लगा है। वहीं अब जब क्षेत्र में भीषण ठंड और पाला गिर रहा है तो ऐसे स्थिति में एक बार फिर से मछलियों का मरना प्रारंभ हो गया है। स्थानीय कारोबारी जितेन्द्र चनौतिया, कमल पलडिय़ा, नवल कुमार, मुकेश साह, राजू भट्ट, विक्की पांडे, देव सिंह गंगोला आदि कारोबारियों ने प्रशासन से जनहित को ध्यान में रखते हुए एरिएशन प्लांट को प्रारंभ करने की मांग की है।

क्या है एरियेशन प्लांट

झील के पानी में आक्सीजन की मात्रा को बढ़ाने के लिए एरियेशन तकनीक का प्रयोग नौकुचियाताल में किया गया है। 2014 में 12 करोड़ की लागत से उपकरण लगाए गए। 2017 तक योजना के तहत सब कुछ ठीक ठाक रहा। मशीनें काम करती रहीं। 2019 में योजना को शासन की उदासीनता के चलते बंद कर दिया गया। इसके आपरेटिंग रूम में ताले लग गए। एरियेशन के अभाव में झील 2014 की स्थिति में आने लगी है। पानी की पारदर्शिता घटने लगी और आक्सीजन की मात्रा भी कम हो गई है।

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