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हम पहाड़ियों पर रहम करों सरकार, हम लोग बहुत गरीब है

मोहन भुलानी : उत्तराखंड सरकार और भारत सरकार से हाथ जोड़कर बिनती हैं कि हमारे पहाड़वासी आजीविका की तलाश में पहाड़ से पलायन कर रहे हैं इससे पहाड़ के घर खण्डर में तब्दील हो रहे हैं तथा खेत खलिहान जंगलों में तब्दील होकर पर्यावरण का रोना रोने वाले पर्यावरण प्रेमियों की मन इच्छा पूरी कर रहे हैं।

स्कूलों में सरकारी मास्टर भी सुगम -दुर्गम के चक्कर में स्कूल नही आते। बच्चे भोजन माता के साथ दाल -भात खाने ही स्कूल जा रहे हैं। जंगली सुअर, बंदर, लंगूर तथा चूहे मौसम की मार के बाद बचे हुए अनाज़ तथा सब्जियों को नाश कर रहे हैं। बाघ और तेंदुवे घर के पास ही इंसानों तथा पालतू जानवरों को अपना निवाला बना रहे हैं।

इलाज़ कराने के लिए अस्पतालकी बिल्डिंग में सिर्फ कंपाउडर ही है डॉक्टर साहब 20 साल से लापता हैं पता नहीं कहाँ चले गए होंगे।

अखबारों से पता चला है कि सरकार बांड भरकर डॉक्टर की पढ़ाई करने वाले डॉक्टरों को खोजने में लगी है अभी कुछ भी सुराख हाथ नही लगा है। अब तो गांव में कोई मर भी गया तो मृत शरीर को जलाने वाले भी नही बचें है।

हे डबल सरकार हम पर रहम करो।

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