देश/प्रदेश

जल संरक्षण के संदेशों के साथ सम्पन्न हुआ रुड़की वाटर कॉन्क्लेव-2020

जल संरक्षण के संदेशों के साथ सम्पन्न हुआ रुड़की वाटर कॉन्क्लेव-2020

· एनआईएच रुड़की के सहयोग से आईआईटी रुड़की ने तीन-दिवसीय सम्मेलन का आयोजन किया।

· अमेरिका, स्पेन, जर्मनी, जापान, नीदरलैंड और यूके सहित 13 देशों से आए विशेषज्ञों ने सम्मेलन में भाग लिया और अपने विचार साझा किये।

· कॉन्क्लेव का उद्देश्य हाइड्रोलॉजिक चुनौतियों के संभावित समाधानों पर चर्चा करना था।

29 फरवरी 2020, रुड़की: भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, रुड़की (आईआईटी रुड़की) ने राष्ट्रीय जल विज्ञान संस्थान, रुड़की (एनआईएच-रुड़की) के सहयोग से तीन-दिवसीय रुड़की वाटर कॉन्क्लेव (आरडब्ल्यूसी) का आयोजन किया। इस द्विवार्षिक आयोजन के पहले संस्करण आरडब्ल्यूसी-2020 का आज आईआईटी रुड़की में समापन हुआ। आरडबल्यूसी-2020 के पहले संस्करण का केंद्र “हाइड्रोलॉजिकल आस्पेक्ट्स ऑफ क्लाइमेट चेंज” था।

इंडस्ट्री 5.0 की ओर बढ़ते हुए विश्व वैश्विक जलवायु और जलीय संसाधनों पर व्यापक प्रभाव से इनकार नहीं किया जा सकता है। दुनिया भर में मीठे पानी के स्रोत दिनों-दिन घटते जा रहे हैं, और यह आवश्यक हो गया है कि इस गंभीर स्थिति से निपटने के लिए कुछ बेहतर समाधानों की तलाश की जाए। ऐसा अनुमान है कि पानी की कमी पूरे विश्व को प्रभावित करेगी। लेकिन, विकास के शुरुआती दौर से गुजर रहे देशों पर इस जलवायु परिवर्तन का सर्वाधिक प्रभाव पड़ सकता है,क्योंकि उनकी अर्थव्यवस्था मुख्यतया कृषि पर निर्भर होती है, जिसके लिए पानी एक बहुत बड़ी आवश्यकता है।

इन तीन दिनों में जल विज्ञान से संबंधित विभिन्न मुद्दों पर कुल 138 तकनीकी पत्र प्रस्तुत किए गए और विभिन्न वक्ताओं ने 33 मुख्य विषयों पर अपने ज्ञान और अनुभव साझा किये। प्लेनरी सेशन-VII कॉन्क्लेव का आखिरी सत्र था। श्री उपेंद्र प्रसाद सिंह, सचिव, जलशक्ति मंत्रालय, केन्द्रीय जल आयोग, नदी विकास और गंगा रेजुवनेशन विभाग, भारत सरकार, नई दिल्ली कॉन्क्लेव में मुख्य अतिथि थे।

मुख्य अतिथि के संबोधन के साथ ही कार्यक्रम अंत की ओर बढ़ा। आरडब्ल्यूसी जैसे कॉन्क्लेव की आवश्यकता के बारे में बोलते हुए श्री उपेंद्र प्रसाद सिंह ने कहा, “जल प्रबंधन की बात करते समय मेरे दिमाग में सबसे पहले आईआईटी रुड़की आता है, और मुझे लगता है कि आईआईटी रुड़की इस विषय पर बोलने के लिए सबसे उपयुक्त जगह है। जलवायु परिवर्तन हमारे समय की सबसे बड़ी समस्या है। जल विज्ञान के क्षेत्र में बदलाव लाने के लिए आवश्यक नवाचार से संबन्धित विचार-विमर्श के लिए आरडब्ल्यूसी जैसा मंच आज की जरूरत है।

एनआईएच रुड़की के निदेशक, डॉ. शरद के. जैन ने इस महत्वपूर्ण सम्मेलन के प्रभाव पर बात करते हुए कहा, “आरडब्ल्यूसी के दौरान विचार-विमर्श में ग्लोबल वार्मिंग और घटते पेय जल संसाधनों से संबन्धित कुछ महत्वपूर्ण पहलुओं को शामिल किया गया। हम सभी स्थिति की गंभीरता से सहमत हैं, लेकिन यह देखना काफी उत्साहजनक है कि हमारे पर्यावरण के संभावित नुकसान को कम करने या रोकने के लिए दुनिया भर में कदम उठाए जा रहे हैं।

इस सम्मेलन के सफल समापन पर प्रो. अजीत के. चतुर्वेदी, निदेशक, आईआईटी रुड़की ने अपनी प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा, “मुझे खुशी है कि कॉन्क्लेव को एक समृद्ध तकनीकी कार्यक्रम बनाने के लिए आईआईटी रुड़की और एनआईएच एक साथ आगे आया है।मुझे उम्मीद है कि यह साझेदारी आने वाले समय में और मजबूत होगी और देश व दुनिया के लिए महत्वपूर्ण अनुसंधान परियोजनाओं पर हम साथ मिलकर काम करेंगे।”

विशेष