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आपदा से प्रभावित छलमा छिलासों गांव के ग्रामीणों ने की पुनर्वास मांग

धारचूला : तहसील मुख्यालय से 50 किमी दूर चौदास पट्टी स्थित बीते दो वर्षों की आपदा से बुरी तरह प्रभावित छलमा छिलासों गांव के ग्रामीणों ने पुनर्वास की मांग को लेकर तहसील मुख्यालय पर मंगलवार को प्रदर्शन किया। पुनर्वास की संस्तुति के बाद यह प्रक्रिया प्रारंभ नहीं होने पर उन्होंने रोष जताया। मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेज मानसून काल से पूर्व अपने जीवन को बचाने की गुहार भी ग्रामीणों ने लगाई है।

पुनर्वास की मांग को लेकर तहसील मुख्यालय पहुंचे ग्रामीणों ने प्रदर्शन के दौरान कहा कि वे 2017 से मानसून काल में प्रतिवर्ष आपदा झेल रहे हैं। गांव की भूगर्भीय जांच के बाद भू वैज्ञानिकों ने पुनर्वास की संस्तुति कर दी है। इसके बाद भी सरकार स्तर पर कार्यवाही नहीं हो रही है। ग्रामीण खानाबदोश जैसी जिंदगी जी रहे हैं। पूरा गांव अनुसूचित जाति के लोगों का है। 136 परिवारों के सिर पर मानसून काल में हर पल मौत मंडराती है। शीतकाल में बर्फबारी से कठिन दिन गुजारे और अब मानसून काल का खौफ सता रहा है। ग्रामीणों ने तत्काल पुनर्वास की मांग करते हुए कहा कि उन्हें भी सुरक्षित ढंग से जीने का हक चाहिए। प्रदर्शन करने वालों में पूर्व प्रधान शंकर वर्मा ,संदीप वर्मा, जितेंद्र वर्मा, चंद्र राम, शीतल वर्मा, हरीश वर्मा, विशन वर्मा, जमन वर्मा, मनीषा वर्मा, कुंदन वर्मा, सुरेंद्र वर्मा, विक्रम वर्मा , राजेंद्र राम, संतोष आदि थे।

चार तोक गांवों में रहते हैं ग्रामीण वर्तमान में ग्रामीण छलमा छिलासों सहित तोक गांव छयालदांग, तलीघर, मलीघर में निवास करते हैं। गांव के सभी लोग बेरोजगार हैं। ग्राम पंचायत में चलने वाले मनरेगा सहित अन्य कार्यो में मजदूरी कर पेट पालते हैं। गांव को शासन प्रशासन ने आपदाग्रस्त गांव घोषित कर दिया है, इस संबंध में राहत दिलाने के कोई कार्य नहीं चल रहे हैं। मनरेगा के कार्य भी बंद हैं। ग्रामीण अपने टूटे-फूटे मकानों को भी ठीक नहीं कर पा रहे हैं। विगत एक साल से गांव के ग्रामीण मजदूरी तक नहीं मिलने से परेशान हैं। ग्रामीण पलायन करने लगे हैं। गांव के मध्य बहने वाली नदी लगातार गांव की भूमि को लील रही है।

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