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पहाड़ों में स्थापित हों सब्जी मंडी और चीड़, सोप स्टोन उद्योग

बागेश्वर : वरिष्ठ नागरिक जन कल्याण ट्रस्ट ने मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजते हुए कुछ सुझाव भी दिए हैं। उन्होंने कहा कि कोरोना महामारी के कारण हजारों प्रवासी घर लौट आए हैं। उनके श्रम का सदुपयोग पर्वतीय अंचल में हो सके इसमें सरकार का अहम रोल है।

ट्रस्ट के अध्यक्ष रणजीत सिंह बोरा के नेतृत्व में सीएम को संबोधित ज्ञापन डीएम को सौंपा। उन्होंने कहा कि जिले में 2600 से अधिक प्रवासी पहुंच गए हैं। पर्वतीय जंगलों में चीड़ बहुतायत है। जिस पर आधारित बड़ा उद्योग लगाया जा सकता है। पिरूल को बिजली में परिवर्तित कर रोजगार के नए आयाम बनाए जा सकते हैं। सोप स्टोन का भी उद्योग लगाया जा सकता है। मंडी स्थापित कर सब्जियां और फल आदि के लिए सुलभ हो सकता है। पर्वतीय क्षेत्र में उत्पादित लीसे से बिरोजा, तारपिन तेल आदि बनाया जा सकता है। जिसके लिए स्थानीय उद्योग लग सकते हैं। चूना पत्थर भी यहां प्रचुर मात्रा में है। सीमेंट फैक्ट्री लगाने के लिए अल्ट्राटेक सीमेंट के साथ पांच हजार करोड़ का एमओयू हो चुका है जिसे जल्द स्थापित किया जाए। डाक व्यवस्था चरमरा गई है। हल्द्वानी, देहरादून को डांक का हब बनाए गए हैं। साधारण डांक पहुंचने में दस दिन लग रहे हैं। उन्होंने स्थानीय स्तर पर ही पूर्ववत डांक वितरण की व्यवस्था की जाए। उत्तराखंड की ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैंण के बजाए जनभावना के अनुरूप गैरसैंण राजधानी घोषित किया जाए। इस मौके पर बाला दत्त तिवारी, दलीप सिंह खेतवाल, इंद्र सिंह परिहार, गोविद भंडारी, भवानी राम आर्य आदि मौजूद थे।

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