देश/प्रदेश

पोस्टर मामला: यूपी सरकार ने HC के फैसले को SC में दी चुनौती

लखनऊ. उत्तर प्रदेश सरकार ने नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के विरोध के दौरान हुई तोड़फोड़ के आरोपियों के पोस्टर हटाने का राज्य सरकार को निर्देश देने संबंधी इलाहाबाद हाईकोर्ट (Allahabad High Court) के आदेश के खिलाफ बुधवार को सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में याचिका दायर की. वहीं, उत्तर प्रदेश सरकार के महाधिवक्ता राघवेंद्र सिंह ने बताया कि जस्टिस उदय यू ललित और जस्टिस अनिरूद्ध बोस की पीठ गुरुवार को राज्य सरकार की अपील पर सुनवाई कर सकती है.

बता दें कि सोमवार को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने लखनऊ में लगे 57 उपद्रवियों के पोस्टर हटाने के आदेश दिए थे. पोस्टर मामले हटाने के मामले में 16 मार्च तक यूपी सरकार को इलाहाबाद हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल के पास रिपोर्ट सौंपनी है.

57 आरोपियों के लगाए गए हैं पोस्टर
लखनऊ में 19 दिसंबर को 2019 को हिंसा करने वाले 57 उपद्रवियों के पोस्टर चौराहे पर लगे हैं. इस पोस्टर में आरोपियों से 1 करोड़ 55 लाख की वसूली का आदेश भी हुआ है.

हाईकोर्ट ने मामले के लिया था संज्ञान
इस मामले का स्वत: संज्ञान लेते हुए रविवार को चीफ जस्टिस गोविन्द माथुर और जस्टिस राकेश सिन्हा की स्पेशल बेंच ने सुनवाई की थी. सोमवार को फैसला सुनाते हुए हाईकोर्ट ने राज्य सरकार की दलीलों को खारिज करते हुए लखनऊ के डीएम और पुलिस कमिश्नर को अविलंब पोस्टर और बैनर हटाए जाने का आदेश दिया. कोर्ट ने आरोपियों के पोस्टर लगाए जाने की कार्रवाई को अनावश्यक और निजता के अधिकार का उल्लंघन माना है.

कोर्ट ने याचिका निस्तारित कीइसके साथ ही राज्य सरकार को सख्त हिदायत दी है कि किसी भी आरोपी से संबंधित कोई भी निजी जानकारी कतई सार्वजनिक न की जाए. किसी भी आरोपी के नाम, पते और फोन नम्बर जैसी जानकारी सार्वजनिक न की जाए, जिससे कि उसकी पहचान उजागर हो सके. हाईकोर्ट ने डीएम और पुलिस कमिश्नर को 16 मार्च तक अनुपालन रिपोर्ट रजिस्ट्रार जनरल के समक्ष दाखिल करने का भी आदेश दिया है. चीफ जस्टिस गोविंद माथुर और जस्टिस रमेश सिन्हा की स्पेशल बेंच ने ओपेन कोर्ट में फैसला सुनाने के बाद याचिका निस्तारित कर दी है.

विशेष