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अवैध खनन रोकने के प्रशासनिक दावों को पलीता लगाते हुए खनन माफिया कर रहे धड़ल्ले से खनन

सुल्तानपुर पट्टी: अवैध खनन रोकने के प्रशासनिक दावों को पलीता लगाते हुए खनन माफिया धड़ल्ले से खनन कर रहे हैं। सूत्रों की माने तो अवैध खनन करवाने वाले कुछ लोग अपनों को बचाते हुए इसकी सूचना प्रशासनिक अधिकारियों को देते हैं। यही कारण है कि जब कार्रवाई होती है तो इस खेल में उनके सहयोगी बच निकलते हैं।

फरवरी-मार्च माह में समय-समय पर पहाड़ व तराई भावर के क्षेत्र में बरसात व हिमपात होता है। इससे कोसी नदी में जल प्रवाह तेजी से बढ़ जाता है। परिणाम स्वरूप खनन सामग्री भी बहाव के साथ उन क्षेत्रों में आती है जहां से पट्टाधारकों द्वारा चुगान करवाया जाता है। जलभराव के चलते जहां प्रशासनिक सीमाएं ध्वस्त रहती हैं, वहीं पट्टाधारक को सीमारेखा से बाहर अवैध खनन चुगान करवाने में कोई परेशानी नहीं होती है जिसका मूल कारण पकड़े जाने पर जलभराव के चलते चुगान के निशां नहीं मिलते हैं। खनन का खेल रात में खुलेआम खेला जाता है जिसमें न तो प्रशासन के सीसीटीवी कैमरे इन वाहनों को देख पाते हैं और ना ही प्रशासन की नजर पड़ती है। रॉयल्टी से पांच गुना अधिक तक खनन किया जा रहा है जिसमें बाहरी वाहनों को काम चलाऊ रॉयल्टी देकर अवैध खनन को खपाया जाता है। प्रशासन अवैध खनन नहीं होने की बात कहता है, जबकि लगातार जारी अवैध खनन से कोसी नदी का बिगड़ा स्वरूप अपनी कहानी स्वयं बयां कर रही है।

ऐसे होता है अवैध खनन का खेल

कोसी नदी हमेशा से खनन कारोबारियों के लिए सोने की खान बनी रही है, जिसमें खनन कार्य से जुड़े कुछ लोग समय-समय पर प्रशासनिक सख्ती को दरकिनार कर अवैध खनन करने से बाज नहीं आते। पिछले कुछ समय तक अवैध खनन पर काफी हद तक अंकुश लग गया था, लेकिन मौजूदा समय में अवैध खनन का खेल खेला जा रहा है। इसके लिए जो तरीका अपनाया है उसे सुनकर हर कोई दंग रह जा रहा है। वर्तमान समय में कोसी नदी के अधिकांश पट्टों में बारिश व कोसी नदी का पानी भरा हुआ है जिसके चलते कुछ पट्टाधारकों द्वारा कोसी नदी के प्रतिबंधित क्षेत्र से अवैध खनन चुगान करवाकर अपने पट्टे से रायल्टियां जारी कर अवैध खनन के खेल को खुलेआम अंजाम दिया जा रहा है।

एक रायल्टी पर चार से पांच चक्कर

खनन चुगान में जुटे लोग अधिक कमाई के चक्कर में एक ही रायल्टी पर दिन में चार से पांच चक्कर लगवा रहे हैं जिससे सरकार को करीब 80 प्रतिशत तक राजस्व का नुकसान हो रहा है।

सरकारी दरों से ढाई गुना तक होती है वसूली

उत्तराखंड शासन द्वारा पट्टाधारकों को करीब 4.63 घनमीटर की रॉयल्टी का शुल्क 1775 रुपये निर्धारित है। बावजूद इसके चार हजार रुपये की वसूली रॉयल्टी के रूप में 100 रुपये की कांटा पर्ची एवं 800 रुपये खेत के हिसाब से लिए जाते हैं जिसमें अन्य खर्चों का हवाला मौखिक रूप से दिया जाता है।

कभी भी बाधित हो सकती है कुमाऊं की आपूíत

कोसी नदी में अवैध खनन करने वाले माफियाओं की वजह से कभी भी कुमाऊं मंडल की विद्युत आपूíत प्रभावित हो सकती है। बताते चलें कि नदी के अंदर फौजी कॉलोनी स्थित 132केवीए विद्युत स्टेशन को आपूíत के लिए 133केवीए की लाइन नदी के बीच से होकर गुजर रही है जिसमें विभाग द्वारा बड़े-बड़े पिलर बनाकर लाइन खिची गई है, लेकिन माफियाओं के हौसले इतने बुलंद हैं कि इन पिलरों के कुओं की गहराई तक लगातार अवैध खनन जारी है जिसके चलते पिलरों की पाइलिग तक खनन माफिया पहुंच गए हैं, ऐसे में आने वाले बरसात के दिनों में तेज बहाव के चलते कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है।

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