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धारचूला के व्यापारियों ने अपने डम्प सामान के लिए चीन जाने की मांगी इजाजत

धारचूला: भारत-चीन व्यापार में भाग लेने वाले भारतीय व्यापारियों ने चीन में पड़े अपने माल को वापस लाने के लिए चीनी मंडी तकलाकोट तक जाने की अनुमति दिए जाने की गुहार भारत सरकार से लगाई हे। व्यापारियों का लाखों का माल पिछले तीन वर्ष से तकलाकोट में डंप पड़ा है।

वर्ष 1992 में शुरू हुआ भारत चीन व्यापार 2019 तक निर्बाध रूप से चलता रहा। भारतीय व्यापारी हर वर्ष व्यापार के अंत में बच जाने वाला माल तकलाकोट में ही किराए पर कमरा लेकर छोड़ आते थे, जिसे अगले वर्ष फिर से बेचा जाता था। वर्ष 2020 में आए कारोना संकट के चलते भारत-चीन व्यापार नहीं हो सका। 2021 में भी कोरोना संकट छाया रहा। 2022 में भी व्यापार के लिए कोई निर्णय नहीं हुआ।

व्यापार एक जून से शुरू होकर अक्टूबर अंत तक संचालित होता है। इस वर्ष अब व्यापार होने की कोई उम्मीद नहीं है। इससे भारतीय व्यापारी खासे परेशान हैं। भारत-चीन व्यापार समिति के अध्यक्ष जीवन सिंह रौंकली ने कहा कि वर्ष 2019 में करीब डेढ़ दर्जन भारतीय व्यापारी अपना लाखों रूपये का कास्टमेटिक, रेडीमेट और खाद्यान्न माल चीनी मंडी तकलाकोट में छोड़ आए थे। इसके लिए व्यापारियों ने तकलाकोट में गोदाम किराए पर लिए थे। तीन वर्ष बाद भी व्यापारी अपना माल वापस नहीं ला सके हैं। इससे कई व्यापारियों को खासा आर्थिक नुकसान हुआ है।

उन्होेंने कहा है कि वर्ष 2019 में वापसी के दौरान भारतीय क्षेत्र में भारी हिमपात के चलते मार्ग बंद हो गया था। भारतीय व्यापारियों ने लोक निर्माण विभाग के आश्वासन पर अपने संसाधनों से मजदूर लगाकर मार्ग खुलवाया था। इसका भुगतान आज तक व्यापारियों को नहीं किया गया है। व्यापारियों ने भारत सरकार से गुहार लगाई है कि उन्हें चीनी मंडी तकलाकोट जाने की अनुमति दी जाए ताकि वे अपना माल वापस ला सकें।

 

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