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पश्चिमी यूपी में इस बार 1.5 लाख RSS स्वयं सेवकों के सामने चुनौती गंभीर 

लखनऊ :  राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ जमीनी स्तर पर अपने प्रभाव का इस्तेमाल हमेशा से चुनावों के दौरान करता रहा है। मतदाताओं के बीच जाकर ज्यादा से ज्यादा मतदान करने के लिए उन्हें प्रेरित करने की कोशिश संघ ने हमेशा से की है और अक्सर बीजेपी को इसका फायदा मिला है। लेकिन, पश्चिमी यूपी में इस बार संघ के सामने चुनौती गंभीर है, क्योंकि सपा-रालोद गठबंधन किसान आंदोलन की वजह से भाजपा के जाट वोट बैंक में सेंध लगाने की कोशिश में है। इसके लिए आरएसएस इस बार पश्चिमी यूपी में कम से कम 1.5 लाख स्वयं सेवकों को उतार चुका है, जो घर-घर जाकर मतदाता जागरूकता अभियान चला रहे हैं। हालांकि, वह किसी पार्टी का नाम नहीं ले रहे हैं, लेकिन उनकी ओर से जो मुद्दे उठाए जा रहे हैं, वह बीजेपी के एजेंडे से मेल खाते हैं।

पश्चिमी यूपी में आरएसएस का मतदाता जागरूकता अभियान उत्तर प्रदेश में किसान आंदोलन की वजह से जाटों के एक वर्ग में भाजपा के खिलाफ नाराजगी को दूर करने के लिए राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ अपने स्तर पर कार्य करने में जुटा है। हालांकि, संघ के स्वयं सेवक लगभग हर चुनाव में जमीनी स्तर पर सक्रिय रहते हैं। धरातल पर काम करने की वजह से आरएसएस के स्वयं सेवक मतदाताओं का मूड भांपने में भी माहिर माने जाते हैं। इस बार पश्चिमी यूपी में जाटों की नाराजगी की बात कही जा रही है और इसलिए उनका दिल जीतने के लिए आरएसएस गंभीरता से कोशिश कर रहा है। टीओआई की एक रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि संघ के स्वयं सेवक शांति से जमीन पर कार्य कर रहे हैं, जिसका लक्ष्य ‘समाज के सदस्यों को वापस लाना है, जो किसान आंदोलन के बाद से बीजेपी अलग हो चुके हैं।’ जब विधानसभा चुनाव की तारीखों की भी घोषणा नहीं हुई थी, आरएसएस ने जाट समाज के पदाधिकारियों को पश्चिमी उत्तर प्रदेश में इस काम में लगा दिया था।

1,50,000 स्वयं सेवक घर-घर जाकर चला रहे हैं अभियान संघ के पदाधिकारियों के अलावा कम से कम 1.5 लाख स्वयं सेवक भी घर-घर जाकर मतदाताओं को जागरूक करने के अपने अभियान में लगे हुए हैं। ये स्वयं सेवक वोटरों को पर्चे दे रहे हैं, जिसमें कुछ खास बातों पर जोर दिया गया है। इसमें किसी भी पार्टी का नाम नहीं लिया जा रहा है, लेकिन मतदाताओं से कहा जा रहा है कि ‘उस पार्टी को वोट दें, जो गौ रक्षा को बढ़ावा देती है, जो दंगाइयों के खिलाफ कार्रवाई करती है और जो राष्ट्रवाद को बढ़ावा देती है।’ संघ ने अपने सुविधानुसार अपने प्रशासनिक क्षेत्र बनाए हुए हैं। मसलन मेरठ प्रांत (क्षेत्र) में मेरठ, सहारनपुर और मुरादाबाद के 14 जिले शामिल हैं। इन जिलों में करीब 196 कस्बे और 10,580 गांव आते हैं; और स्वयं सेवक हर जगह पहुंचने के लिए प्रयासरत हैं।

पश्चिमी यूपी की 71 सीटों के लिए है खास रणनीति मेरठ क्षेत्र में पहले आरएसएस के 2,900 से ज्यादा शाखा लगते थे। लेकिन, जब से 2013 का मुजफ्फरनगर दंगा हुआ है, 600 से ज्यादा और शाखा लगने लगे हैं। चुनाव के जानकारों के मुताबिक मेरठ क्षेत्र में 71 विधानसभा क्षेत्र आते हैं। जिनमें से मोटे तौर पर 47 सीटों को जाट वोटर प्रभावित कर सकते हैं। 2017 के यूपी विधानसभा चुनाव में बीजेपी इस इलाके की 52 सीटें जीती थी। इस बार रालोद के भरोसे समाजवादी पार्टी उसका यही किला ध्वस्त करना चाहती है।

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