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अखिल भारतीय सम्मेलन में सुधारीकरण एवं क्षमता निर्माण पर होगा मंथन

देहरादून,देवभूमि उत्तराखंड संसदीय लोकतंत्र में सुधारीकरण के प्रयासों का गवाह बनने जा रहा है। लोकसभा, राज्यसभा और राज्यों की विधानसभा व विधान परिषदों के पीठासीन अधिकारियों के दून में होने जा रहे अखिल भारतीय सम्मेलन में शून्यकाल सहित सभा के अन्य साधनों के जरिये संसदीय लोकतंत्र का सुधारीकरण एवं क्षमता निर्माण पर मंथन होगा।

सम्मेलन की तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। बुधवार को पीठासीन अधिकारियों के सम्मेलन का उद्घाटन लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला करेंगे। इससे पहले मंगलवार को विधानमंडलों के सचिवों का सम्मेलन होगा।

पीठासीन अधिकारियों के अखिल सम्मेलन के लिए उत्तराखंड को पहली बार मेजबानी मिली है। देहरादून में प्रेमनगर के निकट एक होटल में होने वाले सम्मेलन की सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं।

सोमवार को विधानसभा में पत्रकारों से बातचीत में विधानसभा अध्यक्ष प्रेमचंद अग्रवाल ने यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि सम्मेलन के लिए लोकसभा अध्यक्ष, राज्यसभा के उपसभापति के अलावा 17 विधानसभा अध्यक्ष, 12 उपाध्यक्ष, विधान परिषदों के पांच सभापति, एक उपसभापति और 21 सचिवों की सहमति मिल चुकी है। अतिथियों के पहुंचने का क्रम भी शुरू हो गया है।

विस अध्यक्ष अग्रवाल ने बताया कि पहले दिन 17 दिसंबर को सचिवों का सम्मेलन होगा, जिसमें लोस व राज्यसभा के महासचिव भी शिरकत करेंगे।

18 दिसंबर को पीठासीन अधिकारियों के सम्मेलन का उद्घाटन लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला करेंगे। इस मौके पर अतिथियों के अलावा मुख्यमंत्री, सभी सांसद, मंत्री, विधायकों के साथ ही देहरादून के आसपास के पूर्व विधायक भी मौजूद रहेंगे। 19 दिसंबर को सम्मेलन का समापन होगा। समापन सत्र में राज्यपाल भी मौजूद रहेंगी।

उन्होंने बताया कि पीठासीन अधिकारियों के सम्मेलन में शून्यकाल सहित सभा के अन्य माध्यमों से संसदीय लोकतंत्र का सुधारीकरण और क्षमता निर्माण पर चर्चा होगी।

इसके अलावा संविधान की 10 वीं अनुसूची में अध्यक्ष की भूमिका पर मंथन होगा। इसमें मुख्य रूप से दल परिवर्तन के आधार पर संसद व राज्य विधानमंडलों के सदस्यों को अयोग्य ठहराने के बारे में किए गए उपबंधों पर विस्तृत मंथन होगा। इनके अलावा लोकसभा की ओर से तय किए जाने वाले अन्य बिंदुओं पर विमर्श किया जाएगा।

उन्होंने बताया कि 19 दिसंबर को सम्मेलन के समापन के बाद सभी अतिथि ऋषिकेश में गंगा आरती में शामिल होंगे। उनका गंगा पूजन, भजन संध्या और फिर भारत माता मंदिर में दर्शन का कार्यक्रम रखा गया है।

20 दिसंबर को अतिथियों के लिए तीर्थाटन व पर्यटन के कार्यक्रम रखे गए हैं। तीर्थाटन के लिए उन्हें हरिद्वार, ऋषिकेश ले जाया जाएगा, जबकि पर्यटन के लिए मसूरी, सहस्रधारा की सैर कराई जाएगी। 21 दिसंबर को सभी अतिथियों की वापसी होगी।

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