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उत्तराखंड में गोल्डन कार्ड योजना में बड़े घोटाले की आशंका

हल्द्वानी :  राज्य सरकार की कर्मचारियों व पेंशनर्स के इलाज के लिए गोल्डन कार्ड की नीति शुरुआत से ही विवादों में घिरी है। सरकार कार्ड बनवाने के साथ ही वेतन व पेंशन से कटौती करती रही, लेकिन इलाज की सुविधा नहीं दी। अब राज्य स्वास्थ्य प्राधिकरण आठ महीने में हुए इलाज व उसके खर्च बताने को भी तैयार नहीं है।

सरकार ने जनवरी 2021 से योजना को लागू करते हुए अब तक 429013 कर्मचारियों व पेंशनर्स के कार्ड बनवा लिए हैं। प्रत्येक व्यक्ति से 30 रुपये लिए गए। आरटीआइ एक्टिविस्ट रविशंकर जोशी ने सूचना मांगी कि सरकार कितना प्रीमियम जमा कर रही है। पेंशनर्स व कर्मचारियों से की गई कटौती से अब तक कुल कितनी राशि जमा हो गई है। अब तक कितने लोगों ने लाभ ले लिया है? इसके लिए कितना भुगतान किया गया। राज्य स्वास्थ्य प्राधिकरण ने इसकी सूचना होने से हीइन्कार कर दिया।

देहरादून के नौ अस्पताल ही पैनल में शामिल

कितनी विडंबना है कि जिस गोल्डन कार्ड का बखान सरकार व उनके अधिकारी करते रहे। उसके लिए देहरादून के अलावा किसी अन्य शहरों के अस्पताल को पैनल में शामिल नहीं किया। न ही सही जानकारी दी। जनवरी तक केवल देहरादून स्थित नौ अस्पताल ही शामिल किए गए। जबकि इसकी संख्या ज्यादा बताई जा रही थी।

कर्मचारी व पेंशनर्स करते रहे आंदोलन

सरकार की गोल्डन कार्ड की मनमानी नीति से नाराज कर्मचारी व पेंशनर्स ने लंबे समय तक आंदोलन किया। सरकार से इस नियम को वापस लेने की मांग की, लेकिन किसी ने उनकी मांग नहीं सुनी। सरकार ने भी कर्मचारियों को इलाज को लेकर भ्रम में रखा।

आरटीआइ कार्यकर्ता रविशंकर जोशी का कहना है कि गोल्डन कार्ड नीति पर सरकार सवालों के घेरे में है। सरकार यह बताने तो तैयार नहीं है कि अब तक कितने लोगों को इसका लाभ मिला और इसमें कितना बजट खर्च किया गया। इसकी सूचना न देने भी संशय पैदा करता है।

 

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