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पिंडर घाटी में खनन माफियाओं का आतंक बुलंद, नियमों को ताक पर रख चल रहे हैं मोबाइल स्टोन क्रेशर।

नियमों को को धता बताते स्टोन क्रेशर।

पिंडर घाटी में खनन माफियाओं का आतंक बुलंद, नियमों को ताक पर रख चल रहे हैं मोबाइल स्टोन क्रेशर।

पिंडर घाटी में खनन माफियाओं का आतंक इस कदर है कि शासन प्रशासन भी इन पर काबू नहीं पा रहा है। पहले अवैध खनन और अब नियमों को ताक पर रख लग रहे मोबाइल स्टैंड क्रशरो के आगे शासन प्रशासन भी बौना साबित हो रहा है । अब एक नया मामला प्रकाश में आया है। कर्णप्रयाग- ग्वालदम मोटर मार्ग पर तलवाड़ी में बाज की जंगलों के एकदम बीच एक मोबाइल स्टोन क्रेशर लगा हुआ है ,जहां धड़ल्ले से पत्थरों की पिसाई हो रही है। हालांकि स्टोन क्रेशर स्वामी का कहना है कि उनके पास जिलाधिकारी की वैधानिक अनुमति है ,लेकिन सवाल यह उठता है कि स्टोन क्रेशर नियमावली एवं जिला अधिकारी की अनुमति में दिए गए मानकों के अनुसार स्टोन क्रेशर नहीं लगा हुआ है। स्थानीय पूर्व छात्र संघ अध्यक्ष राजेश चौहान, मोहन गिरी, केसर सिंह, आदि ने बताया कि स्टोन क्रेशर इकाई मानको के अनुरूप उचित स्थान पर नहीं है। जिला प्रशासन द्वारा बाज के पेड़ों के बीच आखिर क्यों स्टोन क्रेशर लगाने की अनुमति दी गई यह चर्चा का विषय है ।बता दें कि पिंडर घाटी में पिछले 3 वर्षों से कोई भी खनन का पट्टा नहीं है बावजूद इसके जिलाधिकारी की स्टोन क्रेशर स्थापित करने की अनुमति भी चर्चा का विषय बनी हुई है। नियमों को धता बताते इन मोबाइल स्टोन क्रेशर को लेकर शासन प्रशासन भी बोना नजर आता दिख रहा है। इससे पूर्व देवाल के बेराधार में भी एक अवैध स्टोन क्रेशर स्थापित करने का मामला सामने आया था, स्थानीय लोगों का कहना है कि शासन प्रशासन को सूचना देने के बावजूद भी स्टोन क्रेशर स्वामी के विरुद्ध कोई कठोर कार्यवाही नहीं हो पाई जिससे पिंडर घाटी में खनन माफियाओं का हौसला बुलंद हुआ है। पूछे जाने पर उप जिलाधिकारी थराली किशन सिंह नेगी ने बताया कि उन्हें मोबाइल स्टोन क्रेशर स्थापना की कोई जानकारी नहीं है इस विषय पर वह जांच करेंगे।

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