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टमाटर का नहीं मिल रहा दाम, धरतीपुत्र मायूस

हल्द्वानी: जिले के गौलापार और कोटाबाग का टमाटर देश में अपनी खास पहचान रखता है. वहीं, इस बार टमाटर की पैदावार काफी अच्छी हुई है, लेकिन इसके भाव इतने गिर गए हैं कि, किसानों को लागत मिलना भी मुश्किल हो गया है. एक तरफ प्याज के बढ़ते दाम से जनता परेशान है तो वहीं दूसरी तरफ टमाटर के भाव गिरने से किसानों के चेहरे पर चिंता की लकीरें साफ देखी जा सकती है.

हल्द्वानी के कोटाबाग, गौलापार सहित कई इलाकों में हर साल बड़ी मात्रा में टमाटर का उत्पादन किया जाता है. यहां का टमाटर उत्तर भारत की मंडियों में खूब शुमार है.

इसके अलावा पाकिस्तान को भी इसका निर्यात किया जाता है. लेकिन इन दिनों टमाटर की पैदावार अधिक होने से मंडियों में टमाटर के दामों में भारी गिरावट आ गई है.

जिसका सीधा असर टमाटर उत्पादन करने वाले किसानों पर पड़ा है. किसान टमाटर को 8 रुपये से 10 रुपये प्रति किलो तक बेचने को मजबूर हैं.

जिससे किसानों को पैदावार में लगी लागत तक नहीं निकलती दिखाई दे रही है. वहीं, किसानों को उम्मीद है कि आने वाले दिनों में टमाटर के भाव में तेजी देखने को मिलेगी.

हालांकि किसानों का कहना है कि, बीते दिनों हुई बरसात टमाटर की खेती के लिए वरदान साबित हुई है. जिससे किसान काफी खुश दिखाई दिए. वहीं टमाटर की फसल में अगर कोई रोग लगता है, तो किसानों के आगे रोजी-रोटी का संकट भी गहरा सकता है. साथ ही बाजार में टमाटर का भाव न मिलने से किसान मायूस दिखाई दे रहे हैं.

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