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राजभवन ने वह विधेयक पुनर्विचार के लिए विधानसभा को लौटा दिया है, जिसमें त्रिस्तरीय पंचायतों में प्रशासकों का कार्यकाल बढ़ाने का उल्लेख है। पंचायतीराज अधिनियम में त्रिस्तरीय पंचायतों में चुनाव न होने की स्थिति में छह माह तक प्रशासक बैठाने का प्रविधान है। हरिद्वार जिले में इस अवधि में चुनाव न होने की स्थिति में सरकार ने दिसंबर में हुए विधानसभा सत्र में प्रशासकों का कार्यकाल छह माह बढ़ाने संबंधी पंचायतीराज द्वितीय संशोधन विधेयक पारित कराया था। उधर, हरिद्वार में प्रशासकों का दूसरा कार्यकाल भी समाप्ति की ओर बढ़ रहा है। इससे उत्पन्न वैधानिक संकट को देखते हुए शासन ने न्याय विभाग व महाधिवक्ता से राय मांगी है।

हरिद्वार जिले में त्रिस्तरीय पंचायतों (ग्राम, क्षेत्र व जिला) के चुनाव अन्य जिलों के साथ नहीं हो पाते। राज्य गठन के बाद से यह क्रम बना हुआ है। हरिद्वार में ग्राम पंचायत का कार्यकाल पिछले वर्ष 29 मार्च, जिला पंचायत का 16 मई और क्षेत्र पंचायतों का कार्यकाल 10 जून को खत्म हो गया था। पंचायतीराज अधिनियम के अनुसार कार्यकाल खत्म होने से 15 दिन पहले तक चुनाव न होने की स्थिति में पंचायतों में छह माह तक प्रशासक बैठाए जा सकते हैं। इस पर सरकार ने हरिद्वार में प्रशासक नियुक्त कर दिए थे, लेकिन छह माह की अवधि बीतने पर भी चुनाव नहीं हो पाए।

इस पर सरकार ने अध्यादेश जारी कर प्रशासकों का कार्यकाल छह माह आगे बढ़ा दिया था। इसके साथ ही दिसंबर में हुए चौथी विधानसभा के अंतिम सत्र में सरकार ने अध्यादेश को पंचायतीराज द्वितीय संशोधन विधेयक के रूप में पेश कर पारित कराया। यह विधेयक मंजूरी के लिए राजभवन भेजा गया था, जिसे राज्यपाल ने पुनर्विचार के लिए लौटा दिया है। उधर, प्रशासकों का कार्यकाल छह बढ़ने के बाद भी हरिद्वार में त्रिस्तरीय पंचायतों में चुनाव की स्थिति नहीं बन पा रही है। इस वैधानिक संकट को देखते हुए अब शासन ने कसरत शुरू कर दी है। साथ ही सबकी नजर अब इस बात पर भी टिक गई है कि आने वाली नई सरकार इस बारे में क्या निर्णय लेती है।

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