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उत्तराखंड में पंचायतों का बजट खर्च न होने से अफसरों से ख़फ़ा है मंत्री

देहरादून। जिलों को पंचायतों में विकास कार्य के लिए 14वें वित्त आयोग से धनराशि जारी होने के बावजूद अफसर इस पर कुंडली मारे बैठे हैं। स्थिति ये है कि राज्य के सभी 13 जिलों में से पांच ने ही पंचायतों को बजट जारी किया है और तो और पंचायत भवनों के निर्माण के साथ ही ग्राम पंचायतों में कॉमन सर्विस सेंटर स्थापना की रफ्तार बेहद सुस्त है।

पंचायतीराज मंत्री अरविंद पांडेय की अध्यक्षता में मंगलवार को सचिवालय में हुई विभागीय समीक्षा बैठक में ये बातें सामने आई। मंत्री पांडेय ने इस पर सख्त नाराजगी जताई। साथ ही 31 मार्च तक आवंटित बजट के सदुपयोग के निर्देश दिए। उन्होंने सचिव को यह भी निर्देश दिए कि जिले से लेकर पंचायत स्तर तक बजट खर्च में लापरवाही बरतने वाले अफसरों को प्रतिकूल प्रविष्टि दी जाए। कैबिनेट मंत्री पांडेय ने कहा कि अगर लक्ष्य हासिल करने में कोई दिक्कत आ रही हो तो ऐसे प्रकरणों को उनके और उच्चाधिकारियों के संज्ञान में लाया जाए।

बैठक के बाद पत्रकारों से बातचीत में पांडेय ने बताया कि अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि बजट का 31 मार्च से पहले सदुपयोग करना सुनिश्चित करें। इस संबंध में वह आगामी 15 मार्च को समीक्षा कर प्रगति की जानकारी लेंगे। अधिकारियों को पूरी प्रगति के साथ इस बैठक में भाग लेने को कहा। राज्य कैडर का होगा वीडीओ पद ग्राम पंचायतों के सुदृढ़ीकरण के मद्देनजर राज्य में अब ग्राम पंचायत विकास अधिकारी (वीडीओ) का पद जिला से राज्य कैडर का होगा। पंचायतीराज मंत्री ने इस संबंध में विभाग को नियमावली में संशोधन के निर्देश दिए।

उन्होंने कहा कि नियमावली में पहाड़ के लिए भौगोलिक क्षेत्र और मैदानी इलाकों के लिए जनसंख्या के हिसाब से पदों को रखा जाए। इससे पर्वतीय क्षेत्र में वीडीओ के पद बढ़ेंगे, जिससे पंचायत के कार्यों में तेजी आएगी। पता चलेगा किस हाल में हैं परिसंपत्तियां पंचायतीराज मंत्री के अनुसार उन्होंने विभाग की जिलों में स्थित

परिसंपत्तियों का ब्योरा एक सप्ताह के भीतर उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। साथ ही परिसंपत्तियों से कितनी आय हो रही है, इसका ब्योरा भी मांगा है। उन्होंने कहा कि जिलों में पंचायत की बड़ी संख्या में परिसंपत्तियां हैं, मगर देखरेख के अभाव में कुछ निष्प्रयोज्य पड़ी हैं और कुछ से नाममात्र की आय हो रही है।

 

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