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अखरोट का सिरमौर बनेगा गंगा-यमुना का मायका उत्तरकाशी

उत्‍तरकाशी, सेब की तरह अखरोट उत्पादन के लिए भी गंगा-यमुना का मायका उत्तरकाशी जिला सबसे मुफीद है। इसी को ध्यान में रख उद्यान विभाग ने जिले को मिशन अखरोट के तहत बागवानी के लिए चुना है।

इस कड़ी में विभाग ने यहां कागजी अखरोट और पिकनट की नर्सरी भी तैयार कर दी है। अभी तक उत्तरकाशी जिले में फल उत्पादन को लेकर केवल सेब का नाम भी सामने आता है।

लेकिन, अब जल्द ही यहां के अखरोट भी अपनी खास पहचान बना सकते हैं। इसके लिए उद्यान विभाग ने जिला मुख्यालय से 15 किमी दूर डुंडा में अपनी भूमि पर कागजी अखरोट और पिकनट की नर्सरी तैयार की है।

कागजी अखरोट का पहला बागीचा नौगांव ब्लॉक के डामटा में लगाया जा रहा है। इसके लिए काश्तकारों ने अखरोट उत्पादन का प्रशिक्षण भी ले लिया है।

यहां इसी शीतकाल में दो हेक्टयर भूमि पर कागजी अखरोट की बागवानी की जानी तय है। इस योजना को बढ़ावा देने के लिए केंद्र व राज्य सरकार, दोनों ही पहल कर रहे हैं।

अखरोट उत्पादन में काश्तकारों का रुझान बढ़ रहा है और वह अखरोट के बागीचे लगाने के लिए उद्यान विभाग को प्रस्ताव दे रहे हैं।

डामटा के अलावा डुंडा, चिन्यालीसौड़ व भटवाड़ी ब्लॉक के काश्तकारों ने भी आवेदन किया है। बाजार में अखरोट की बढ़ती मांग और अच्छे दाम भी काश्तकारों के रुझान बढ़ने का कारण हैं।

प्रभाकर सिंह (मुख्य उद्यान अधिकारी, उत्तरकाशी) का कहना है कि पहल चरण में दो हेक्टेयर में अखरोट की बगवानी की जा रही है। अखरोट उत्पादन में उत्तरकाशी को सिरमौर बनाने का लक्ष्य है।

साथ ही पिकनट की बागवानी के लिए काश्तकारों को प्रेरित किया जा रहा है। पिकनट अखरोट प्रजाति का ही फल है। विदेशों में पिकनट की काफी मांग है।

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