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गौला नदी में सरकार ने राजस्व और रोजगार को देखते हुए फिर दी खनन की अनुमति

हल्द्वानी: कुमाऊं की सबसे बड़ी गौला नदी में खनन से सबसे ज्यादा राजस्व प्राप्त होता है. इस बार शासन ने केवल 18 लाख घन मीटर चुगान की अनुमति दी थी जो लक्ष्य 28 फरवरी को पूरा हो गया. लेकिन सरकार ने दोबारा गौला नदी में 12 लाख घन मीटर खनन चुगान की अनुमति दे दी है. इस फैसले के बाद खनन से जुड़े हजारों लोगों ने राहत की सांस ली है. साथ ही सरकार के राजस्व में भी इजाफा होने वाला है.

गौला नदी में खनन सत्र 31 मई तक चलता है, लेकिन इस बार नदी में उप खनिज कमाने के चलते फरवरी महीने में ही उप खनिज का लक्ष्य पूरा हो गया था. इसके बाद खनन से जुड़े हजारों लोग परेशान चल रहे थे. जिसके बाद अब शासन ने नदी के सर्वे के बाद गौला नदी में दोबारा से खनन की अनुमति दे दी है.

गौरतलब है कि गौला नदी में 7000 वाहन और दो हजार घोड़ा बग्गी सहित 15000 मजदूर रोजाना रोजगार पाते हैं. इसके अलावा हर साल सरकार को करीब 500 करोड़ का कारोबार कुमाऊं क्षेत्र में गौला नदी से होता है.

जिला खनन अधिकारी रवि नेगी ने बताया कि बढ़ाए गए खनन लक्ष्य से सरकार को करीब 80 करोड़ के राजस्व का सीधा लाभ पहुंचेगा. साथ ही स्थानीय लोगों को रोजगार भी मिलेगा.

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