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वन विभाग अपनी परिसंपत्तियों के संरक्षण को लेकर हुआ लापरवाह

चंबा: वन विभाग अपनी परिसंपत्तियों के संरक्षण को लेकर लापरवाह बना हुआ है। पर्यटन स्थल कौड़िया के अतिथि गृह को ही देख लीजिए जो न खुद विभाग के काम आ रहा और न दूसरे इसका लाभ मिल पा रहा है। वह दिनों जर्जर होता जा रहा है,लेकिन विभाग उसकी सुध नहीं ले रहा।

काणाताल-सूल्याधार मोटर मार्ग पर पर्यटन स्थल कौड़िया के मध्य तत्कालीन महाराजा ने 1910 में इस अतिथिगृह को बनाया था, लेकिन अब बिना देखरेख के सौ साल से अधिक पुराना अतिथि गृह जर्जर हो गया है, लेकिन विभाग का ध्यान इस ओर नही है। कौड़िया के देवदार के घने जंगलों के मध्य बने अतिथि गृह की सुध नही ली जा रही है। अतिथि गृह की दीवारें तो सही सलामत हैं, लेकिन छत की चदरों को थामने वाली लकड़िया सड़ती जा रही हैं। इसके अलावा खिड़की व दरवाजे भी मजबूत स्थिति में नही है। अतिथि गृह का फर्श उखड़ चुका है। चार कमरे कीचन और एक बड़े बरामदे वाले अतिथि गृह के दोनों ओर खुला आंगन भी है। सही देख-रेख न होने के कारण कई बार अतिथि गृह के बाहर आवारा पशु डेरा जमा देते हैं जिससे वहां टूट फूट होती रहती है। कमरे तो बंद हैं, लेकिन बरामदा खुला रहता है। लोग वहां पिकनिक पर आते हैं और गंदगी करके चले जाते हैं।

यदि विभाग इसकी नये ढंग से मरम्मत कर सौंदर्यकरण करे को इसका लाभ सबसे पहले खुद विभाग को ही होगा साथ ही दूसरे लोगों को भी यहां रूकने की सुविधा मिलेगी। शहरी शोर शराबे से दूर इस अतिथि गृह को वन विभाग अपनी आय का जरिया भी बना सकता है,लेकिन इस ओर तो ध्यान ही नही दिया जा रहा है। क्षेत्र के पूर्व प्रधान देव सिंह पुंडीर का कहना है कि कौड़िया वैसे भी सुन्दर जगह है और ऐसी जगह पर बने अतिथि गृह को भी सुन्दर होना चाहिए। इसलिए विभाग को इसकी मरम्मत कर सौंदर्यकरण करना चाहिए। वन विभाग के रेंज अधिकारी आशीष डिमरी का कहना है कि उक्त अतिथि गृह के जीर्णोद्वार के लिए कार्य योजना तैयार की जा रही है। जल्द ही इसके लिए धनराशि स्वीकृत कराई जायेगी।

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