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अधिकारियों के सम्मेलन में दिखे उत्तराखंड की लोकसंस्कृति के रंग

देहरादून, देश के विधायी निकायों के पीठासीन अधिकारियों के सम्मेलन के दौरान जहां लघु भारत के दर्शन हुए, वहीं उत्तराखंड की लोकसंस्कृति के विविध रंगों से भी पीठासीन अधिकारी रूबरू हुए।

उद्घाटन के मौके पर कलाकारों ने कुमाऊं के पारंपरिक छौलिया नृत्य की प्रस्तुतियों से समां बांधा तो शाम को सांस्कृतिक संध्या में सांस्कृतिक दलों ने लोकरंगों की विविध छटा बिखेरी।

दून में आयोजित किए जा रहे सम्मेलन में लोकसभा, राज्यसभा के साथ ही राज्यों के विधानमंडलों के पीठासीन अधिकारियों का स्वागत पारंपरिक ढंग से तिलक कर किया गया।

इसके साथ ही आयोजन स्थल पर उद्घाटन के अवसर पर कलाकारों ने पारंपरिक छौलिया नृत्य की एक से बढ़कर एक प्रस्तुतियां देकर सभी का ध्यान अपनी ओर खींचा।

सांस्कृतिक संध्या में संस्कार सांस्कृतिक समिति अल्मोड़ा, जौनसार बावर लोककला मंच, मां बाराही सांस्कृतिक कला मंच हल्द्वानी के कलाकारों ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं। उन्होंने उत्तराखंड के गढ़वाली, कुमाऊंनी, जौनसारी लोकगीत-नृत्य के अलावा अन्य राज्यों के लोकरंगों की छटा भी बिखेरी।

सम्मेलन के उद्घाटन के अवसर पर पीठासीन अधिकारियों को डॉक्यूमेंट्री भी दिखाई गई, जिसमें उत्तराखंड के गठन से लेकर उसकी अब तक की विकास यात्रा को प्रदर्शित किया गया। साथ ही यहां के प्रमुख धार्मिक व पर्यटक स्थलों, संरक्षित क्षेत्रों के बारे में भी जानकारी दी गई।

सम्मेलन के उद्घाटन समारोह में मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा कि हमारे विधानसभा अध्यक्ष भी पूरी शालीनता व संयम से सदन चलाते हैं। उन्होंने हंसते हुए कहा कि हम कई बार विधानसभा अध्यक्ष से कहते हैं कि बाहर भी ऐसे ही रहा करो।

पीठासीन अधिकारियों के सम्मेलन में संविधान की 10 वीं अनुसूची और अध्यक्ष की भूमिका विषय पर चर्चा होगी। सम्मेलन के समापन सत्र में उत्तराखंड की राज्यपाल बेबी रानी मौर्य भी उपस्थित रहेंगी।

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