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टिहरी झील बनेगा देश दुनिया के पर्यटकों के लिए नया डेस्टिनेशन

पर्यटन सचिव दिलीप जावलकर ने कहा कि परियोजना का उद्देश्य टिहरी को उत्तराखंड के ब्रांड टूरिस्ट डेस्टिनेशन के रूप में स्थापित करने का है। जिससे स्थानीय लोगों की भागीदारी सुनिश्चित करते हुए विकसित किया जाएगा। एडीबी की टीम जल्द ही उत्तराखंड का दौरा करेगी।

टिहरी झील पर्यटन विकास परियोजना को केंद्रीय वित्त मंत्रालय ने मंजूरी दे दी है। इस परियोजना से टिहरी झील और जलसंग्रहण क्षेत्र पर्यटकों के लिए नया डेस्टिनेशन बनेगा। परियोजना के लिए एशियन डेवलपमेंट बैंक और ब्रिक्स डेवलपमेंट बैंक से करीब 1800 करोड़ की सहायता मिलेगी।

परियोजना के तहत नई टिहरी में कोटी कालोनी, तिवाड़ गांव, डोबरा चांटी, टिहरी झील, मदन नेगी को क्लस्टरों के रूप में विकसित किया जाएगा। टिहरी झील में चार स्थानों पर जल क्रीड़ा केंद्र, टेंट कॉलोनी निर्माण, कोटी कॉलोनी से डोबरा-चांटी तक पर्यटन रोड का निर्माण, होम स्टे क्लस्टरों का निर्माण, डोबरा चांटी पार्क, मल्टी लेवल कार पार्किंग, एकीकृत सूचना केंद्र, मनोरंजन कॉम्पलेक्स, एक्वेटिक  कॉम्प्लेक्स, थ्री स्टार बुटीक होटल, स्मार्ट इन्फ्रास्ट्रक्चर, जैव विविधता पार्क, योग एवं पंचकर्म केंद्र, रोपवे निर्माण, तटीय क्षेत्र में पौधरोपण, लाइट एवं साउंड लेजर शो समेत अन्य कार्य प्रस्तावित है।

एडीबी की टीम जल्द ही उत्तराखंड का दौरा करेगी। पर्यटन सचिव दिलीप जावलकर ने कहा कि इस परियोजना का उद्देश्य टिहरी को उत्तराखंड के ब्रांड टूरिस्ट डेस्टिनेशन के रूप में स्थापित करने का है। जिससे स्थानीय लोगों की भागीदारी सुनिश्चित करते हुए विकसित किया जाएगा।

हरित तकनीकी का प्रयोग किया जाएगा

टिहरी शहर के ऐतिहासिक महत्व को पुनर्स्थापित करने और पर्यटन ढांचे को मजबूत बनाने के साथ ही रोजगार के नए पद सृजित किए जाएंगे। परियोजना से पर्यटकों के टिहरी प्रवास की औसत अवधि को बढ़ाकर तीन दिन तक करना भी शामिल है। परियोजना से प्रत्यक्ष तौर पर लगभग चालीस हजार और परोक्ष रूप से लगभग दो लाख परिवार लाभान्वित होंगे। उन्होंने कहा कि परियोजना के लिए हरित तकनीकी का प्रयोग किया जाएगा।
बता दें कि प्रदेश के सरकार ने वित्त मंत्रालय को टिहरी झील पर्यटन विकास परियोजना का संशोधित प्रस्ताव भेजा था। जिसमें टिहरी में पर्यटन अवस्थापना व सुविधाओं के विकास के साथ झील के चारों ओर एक रिंग रोड बनाने का प्रस्ताव भी शामिल है। प्रस्ताव को नीति आयोग, ग्रामीण विकास मंत्रालय, सड़क परिवहन मंत्रालय और पर्यटन मंत्रालय की अनुमति के बाद वित्त मंत्रालय ने मंजूरी दी है।

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