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चंपावत जिले की सीमा वाले गावों में सार्वजनिक परिवहन नहीं होने से ग्रामीण परेशान

चंपावत। जिले के नेपाल सीमा से लगने वाले अधिकांश गांव भले ही सड़क सुविधा से जुड़ गए हैं। लेकिन इन सड़कों पर सार्वजनिक परिवहन का कोई माध्यम नहीं होने से निजी टैक्सियां ही आवागमन का एकमात्र सहारा हैं। पूर्व में उत्तराखंड परिवहन निगम की ओर से मंच-तामली मोटर मार्ग में रोडवेज बस का संचालन किया गया था। लेकिन सड़क के कई स्थानों पर संकरी होने के कारण कुछ ही दिनों में रोडवेज बस का संचालन बंद कर दिया गया।

मार्ग पर रोडवेज बस सेवा नहीं होने से बुजुर्गों और पेंशनरों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। जिन्हें निजी टैक्सियों में ज्यादा किराया देना पड़ता है। इसके अलावा छात्राओं को भी निशुल्क बस यात्रा का लाभ नहीं मिल पा रहा है। सीमांत क्षेत्र की सुरक्षा का जिम्मा संभालने वाले एसएसबी जवानों को भी रोडवेज बस सेवा का अभाव काफी खलता है। क्षेत्र के जनप्रतिनिधि कई बार शासन-प्रशासन के उच्चाधिकारियों के साथ ही रोडवेज प्रबंधन के समक्ष सीमांत क्षेत्र के टनकपुर-तामली बस सेवा शुरू किए जाने की मांग उठा चुके हैं। लेकिन अब तक उनकी मांग पूरी नहीं हो सकी है।

मजबूरी है ज्यादा किराए का भुगतान करना
सीमांत मंच-तामली मोटर मार्ग में चलने वाली निजी टैक्सियों में ज्यादा किराए का भुगतान करना मजबूरी है। चंपावत से मंच का किराया 80 रुपये और तामली का किराया 110 रुपये है।
माया देवी, यात्री।

आपात स्थिति में वाहन बुक कराना पड़ता है
मंच और तामली के बीच चलने वाली अधिकांश टैक्सियां सुबह आठ बजे तक चंपावत को चले जाती हैं। उसके बाद यदि कोई आपात की स्थिति पैदा हो जाती है तो ग्रामीणों को वाहन बुक कराना पड़ता है।
हीरा सिंह, यात्री।

यात्रियों को दिला रहे हैं बेहतर सुविधा
मार्ग पर चलने वाली टैक्सियों में यात्रियों को बेहतर परिवहन सुविधा दी जा रही है। प्रशासन और टैक्सी यूनियन की सहमति के आधार पर ही विभिन्न स्थानों के लिए यात्रियों से निर्धारित किराया ही लिया जाता है।
अशोक सिंह, टैक्सी चालक।

बदहाल बनी मंच-तामली सड़क
सीमांत क्षेत्र के दो दर्जन से अधिक गांवों और कस्बाई इलाकों को जोड़ने वाली मंच-तामली सड़क की हालात बेहद खराब है। सड़क पर जगह जगह बने गढ्ढों के कारण वाहनों में काफी टूट फूट होती है।
लक्ष्मण सिंह, टैक्सी चालक।

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