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राष्ट्रीय शराब रोकथाम नीति की मांग पर सुप्रीम कोर्ट का इनकार

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को राष्ट्रीय शराब रोकथाम नीति की मांग वाली याचिका को अस्वीकार कर दिया है. सर्वोच्च अदालत ने केंद्र को राष्ट्रीय स्तर पर शराब रोकथाम नीति बनाने का निर्देश देने की मांग पर कोई भी आदेश देने से साफ मना कर दिया है. चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया यूयू ललित की अध्यक्षता वाली सुप्रीम कोर्ट की दो सदस्यीय पीठ ने कहा, ‘यह नीतिगत मामला है. हम हस्तक्षेप नहीं करेंगे.

यह हमारा अधिकार क्षेत्र नहीं: सुप्रीम कोर्ट

जवाब में चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया यूयू ललित ने कहा कि इसमें राजस्व का एक पहलू है. अगर कुछ मामलों में कुछ किया जाता है तो आप उनके राजस्व को रोक देंगे. इस राजस्व का उपयोग सामाजिक कार्यों के लिए किया जाता है. यह दलील सरकार को नीति बनाने का निर्देश देने जैसा है, यह हमारा अधिकार क्षेत्र नहीं है. सीजेआई ने कहा कि आप जिन रिपोर्ट का हवाला दे रहे हैं, वो दर्शाती हैं कि केंद्र समस्या के प्रति सचेत है. आप इस तरह के मामलों का चुनौती नहीं दे सकते हैं. आप जो चाहते है वो कर सकते हैं. लेकिन हम इस मामले को नहीं छूएंगे.

सरकार से जवाब तलब किया जा सकता है: SC

वकील ने कहा कि सरकार से जवाब तलब किया जा सकता है कि वे इसके बारे में क्या सोचते हैं. पीठ में शामिल जस्टिस रवींद्र भट ने पूछा फिर क्या होगा? यह कहां जाकर समाप्त होगा. हम कोई आदेश नहीं देंगे. आप याचिका वापस लें, अन्यथा हम खारिज कर रहे हैं. वकील ने याचिका वापस लेने का अनुरोध किया. इस पर पीठ ने मंजूरी प्रदान कर दी.

इसके साथ ही आज सुप्रीम कोर्ट नागरिकता संशोधन (अधिनियम) 2019 से जुड़ी याचिकाओं पर भी सुनवाई करेगा. चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया यूयू ललित और जस्टिस एस रवींद्र भट की पीठ आज ऐसी कम से कम 220 जनहित याचिकाओं पर सुनवाई करेगी.

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