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चार धाम सड़क परियोजना को सुप्रीम कोर्ट से हरी झंडी

उत्तराखंड (Uttarakhand) में केंद्र की चार धाम सड़क परियोजना (Char Dham Road Project) को सुप्रीम कोर्ट से हरी झंडी मिल गई है. सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने आज केंद्र सरकार (Central Government) को चार धाम सड़क परियोजना के लिए तीन डबल-लेन हाईवे (Double Lane Highways) बनाने की इजाजत दे दी है. दरअसल, केंद्र सरकार ने इससे पहले इंडो चाइना सीमा (Indo China Border) की ओर जाने वाली सड़क को चौड़ा करने की मांग की थी.

कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा, ‘हाल के दिनों में सीमाओं पर सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौतियां सामने आई हैं. यह अदालत सशस्त्र बलों की ढांचागत जरूरतों का दूसरा अनुमान नहीं लगा सकती है.’ शीर्ष अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश एके सीकरी के नेतृत्व में एक समिति का भी गठन किया है, जो यह सुनिश्चित करेगी कि पर्यावरण के हित में सभी उपचारात्मक उपाय किए जाएं और परियोजना के साथ आगे बढ़ते हुए समिति की सिफारिशों को लागू किया जाए. निगरानी समिति को रक्षा मंत्रालय, सड़क परिवहन मंत्रालय, उत्तराखंड सरकार और सभी जिलाधिकारियों से पूरा सहयोग मिलेगा.

केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से की थी अपील

केंद्र ने इससे पहले सुप्रीम कोर्ट से कहा था कि चारधाम राजमार्ग परियोजना में सड़कों को चौड़ा करने की जरूरत है. ये राजमार्ग चीन की सीमा तक जाता है और वहां आने वाली मुश्किलों को देखते हुए ऐसा करना जरूरी है. रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण 900 किलोमीटर लंबी चारधाम राजमार्ग परियोजना का उद्देश्य उत्तराखंड के चार तीर्थ नगरों यमुनोत्री, गंगोत्री, केदारनाथ और बद्रीनाथ को हर मौसम में संपर्क प्रदान करना है.

गैर सरकारी संगठन ने सड़क चौड़ीकरण को दी थी चुनौती

एक गैर सरकारी संगठन (NGO) ‘सिटीजन्स फॉर ग्रीन दून’ ने सड़क को 10 मीटर तक चौड़ा करके डबल लेन बनाने को चुनौती दी थी. कोर्ट ने देश की रक्षा जरूरतों के आधार पर सरकार की अधिसूचना को सही ठहराया. हालांकि पर्यावरण से जुड़ी चिंताओं पर नजर रखने के लिए पूर्व जस्टिस एके सीकरी की अध्यक्षता में समिति का गठन किया गया है. यह समिति सीधे सुप्रीम कोर्ट को अपनी रिपोर्ट देगी.

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