उत्तराखंड

केदारनाथ मंदिर के गर्भ गृह में सोने की परत चढ़ाए जाने का जमकर विरोध

उत्तराखंड के केदारनाथ मंदिर के गर्भ गृह में सोने की परत चढ़ाए जाने का तीर्थ पुरोहितों ने जमकर विरोध किया. उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि जबरन मंदिर में सोना लगाया तो आंदोलन के साथ तीर्थ पुरोहित भूख हड़तााल शुरू करेंगे. बता दें केदारनाथ धाम में महाराष्ट्र के भक्त के सहयोग से 230 किलो सोने से गर्भगृह की दीवारों पर सोने की परत चढ़ाई जा रही है.

सरकार की तरफ से गर्भगृह की दीवारों पर सोना चढ़ाने की परमिशन सरकार की तरफ से मिली है. बाबा केदार के गर्भगृह की दीवारों पर सोने की परत लगाई जानी थी, लेकिन उससे पहले तीर्थपुरोहितों ने जोर-शोर से विरोध शुरू कर दिया. पुरोहितों का कहना है कि यह परंपराओं के खिलाफ है. जिसका पूर्ण रूप से विरोध किया जाएगा.

दीवारों पर सोने की परत चढ़ाने का विरोध

केदारनाथ धाम के तीर्थपुरोहित आचार्य संतोष त्रिवेदी ने गर्भगृह की दीवारों पर सोने की परत चढ़ाने का विरोध किया है. उन्होंने कहा कि पांडवकालीन मंदिर, जिसका आदि गुरु शंकराचार्य द्वारा जीर्णोद्धार किया गया था, उसे पहले भी चांदी से आच्छादित किया गया था. पुरोहित ने कहा कि गर्भगृह को ठंडा रखा जाता है. क्यों कि चांदी का स्वभाव ठंडक है. लेकिन सोना गर्म होता है.

तीर्थपुरोहित ने दी भूख हड़ताल की चेतावनी

पुरोहित ने कहा कि आज ड्रिलिंग मशीन से गर्भगृह को क्षति पहुंचाई जा रही है. उन्होंने कहा कि सरकार अगर इस निर्णय को जल्द वापिस नहीं लेगी तो तीर्थपुरोहित समाज भूख हड़ताल पर बैठने को मजबूर होगा. पुरोहित का कहना है कि मंदिर का गर्भगृह मोक्ष की जगह है और मोक्ष की जगह पर सोना नहीं लगाया जाता है. साथ ही मंदिर के सदियों पुराने पत्थरों को ड्रिल मशीन से क्षति पहुंचाने की कोशिश की जा रही है.

‘मोक्षधाम में नहीं लगाते सोना’

गुस्साए पुरोहित गर्भगृह से ड्रिल मशीन बाहर ले आए और सोना लगाए जाने का जोर-शोर से विरोध करने लगे.लोगों का कहना है कि पौराणिक परंपराओं के मुताबिक केदारनाथ मोक्षधाम है. और मोक्षधाम में सोना नहीं लगता है, क्यों कि सोने में कलयुग का वास है. भगवान के गर्भगृह में सोना लगाने का मतलब है कि कलयुग को गर्भगृह में बिठाना. यही वजह है कि पुरोहित दीवारों पर सोने की परत चढ़ाने का विरोध कर रहे हैं.

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