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सीएए के समर्थन में सड़कों पर उमड़ा हुजूम

देहरादून, लोक अधिकार मंच के आह्वान पर रविवार को नागरिकता संशोधन कानून के समर्थन में हजारों लोग सड़कों पर उतर आए। प्रदेश भाजपा की ओर से लोक अधिकार मंच को पूर्ण समर्थन दिया गया।

लोगों का हुजूम रैली के रूप में शहर के मुख्य बाजार में निकला और लोगों को नागरिकता संशोधन कानून की प्रक्रियात्मक जानकारी दी।

रविवार को हजारों की संख्या में भीड़ परेड मैदान में एकत्रित हुई। देहरादून के सीमांत क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में लोग रैली में शामिल होने पहुंचे। ढोल नगाड़ों और लाउड स्पीकरों के साथ रैली दोपहर सवा 12 बजे परेड ग्राउंड से रवाना हुई।

जहां से लैंसडौन चौक होते हुए रैली ने घंटाघर के लिए कूच किया। इस दौरान बड़ी संख्या में पुलिस बल पूरी मुस्तैदी के साथ रैली के आगे चल रहा था। घंटाघर पहुंचकर रैली ने पलटन बाजार में प्रवेश किया।

नागरिकता संशोधन कानून के समर्थन में नारे लगाते हुए लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील की। पलटन बाजार से रैली ने डिस्पेंसरी रोड का रुख किया।

यहां से होते हुए रैली दर्शनलाल चौक पहुंचे और फिर वापस लैंसडौन चौक होते हुए रैली परेड मैदान में करीब पौने दो बजे संपन्न हुई। इस दौरान भाजपा, भाजयुमो के नेता और कार्यकर्ता बड़ी संख्या में रैली में शामिल हुए। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष सांसद अजय भट्ट ने रैली की अगुआई की। रैली के कारण शहर के मुख्य मार्गों पर घंटों जाम की स्थिति रही।

भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष अजय भट्ट ने रैली को संबोधित करते हुए कहा कि नागरिकता संशोधन कानून को लेकर लोगों में भ्रम फैलाया जा रहा है।

इस कानून से देश के किसी भी व्यक्ति को कोई परेशानी नहीं होगी। जबकि कुछ पार्टियां इसका राजनीतिक लाभ लेने के लिए लोगों को गुमराह कर रही हैं।

उन्होंने आरोप लगाया कि विरोध करने वाले आम जनता को गुमराह कर रहे हैं, लेकिन देश की जनता समझदार है और केंद्र सरकार के फैसले के साथ खड़ी है। यह विशाल रैली इसी बात का सबूत है।

रैली के दौरान लोगों के हाथों में तिरंगे थे और कोई माथे पर तिलक लगाकर तो कोई ढोल की थाप पर नारे लगाते हुए आगे चल रहे थे। इसके अलावा कुछ समर्थक 72 फीट लंबा तिरंगा लेकर रैली के साथ चले। समर्थक रैली में अपने सर के ऊपर तिरंगा ओढ़कर नारे लगा रहे थे।

रैली में कहने को तो दस हजार से अधिक लोग शामिल हुए, लेकिन इनमें कई लोग ऐसे थे जिन्हें यह भी पता नहीं था कि रैली क्यों निकाली जा रही है। रैली में शामिल बच्चे और अधिकांश बुजुर्ग तो नागरिकता संशोधन कानून से ही अनभिज्ञ मिले। बस उन्हें तो अपने साथियों और रिश्तेदारों के साथ रैली में शामिल होना था।

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