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स्टीव जाब्स और मार्क जकरबर्ग रहे हैं नीब करौरी महाराज के उपासक

नैनीताल : वर्तमान में भारतीय साधु-संतों को लेकर जाे धारणा है, वह किसी से छिपी नहीं है। इसके इतर सादा और प्रकृति के बीच बिना किसी आडंबर के जीवन जीने वाले कैंची धाम के नीब करौरी महराज की ख्याति देश दुनियाभर में है। उनमें आस्था रखने वालों में एप्पल के संस्थापक स्टीव जाब्स, फेसबुक के मालिक मार्क जुकरबर्ग, अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा, हालीवुड अभिनेत्री जूलिया राबर्ट जैसी सख्शियतें शामिल हैं।

स्टीव जॉब्स को भारत में मिली थी आध्यात्मिक शक्ति

एप्पल के संस्थापक स्टीव जॉब्स ने 12 जून 2005 को स्टेनफोर्ड यूनिवर्सिटी में जीवन का सबसे चर्चित स्पीच “Stay Hunger Stay Foolish” दी थी। इस दौरान उन्होंने अपने जीवन से जुड़ी एक कहानी सुनाई थी। स्टीव जॉब्स अपने कॉलेज के दोस्त डैन कोट्टे के साथ 1974 में भारत आए थे। यहां जिस आश्रम में वह रुके संभवत: वह आश्रम नीम करौली बाबा का था। जब वह भारत पहुंचे तब तक बाबा समाधि ले चुके थे। लेकिन यहां पहुंचने उन्हें एक आध्यात्मिक शक्ति मिली, जिसने उनका जीवन बदल दिया।

भारत आने पर बदली फेसबुक के मालिक की जिंदगी

27 सितंबर 2015 को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी फेसबुक के मुख्यालय में थे। इस दौरान जुकरबर्ग ने पीएम को भारत भ्रमण की बात बताई। उन्होंने कहा कि जब संकट के दौर से गुजर रहे थे तब एप्पल के फाउंडर स्टीव जॉब्स ने उन्हें भारत भारत भ्रमण की सलाह दी थी। जुकरबर्ग ने बताया था कि वे एक महीना भारत में रहें। इस दौरान उस मंदिर में भी गए थे। जुकरबर्ग आए तो एक दिन के लिए थे, लेकिन मौसम खराब हो जाने के कारण वह यहाँ दो दिन रुके थे। जुकरबर्ग मानते हैं कि भारत में मिली अध्यात्मिक शांति के बाद उन्हें फेसबुक को नए मुकाम पर ले जाने की ऊर्जा मिली।

जूलिया राबर्ट हैं बाबा की अनन्य भक्त

हालीवुड की मशहूर अभिनेत्री जूलिया रॉबर्ट ने एक इंटरव्यू में खुलासा किया था कि वह नीब करौरी बाबा की तस्वीर से इतना प्रभावित हुई थीं कि उन्होंने हिन्दू धर्म अपनाने का फैसला कर लिया। इसके बाद अपनी फिल्‍म ‘ईट, प्रे, लव’ की शूटिंग के लिए भारत आईं जूलिया रॉबर्ट ने 2009 में हिंदू धर्म अपना लिया था। जूलिया हिन्दू धर्म का पालन करती हैं। वो अपने पति और तीनों बच्चों के साथ मंदिरों में प्रार्थना करने भी जाती हैं। जूलिया भारत में घर खरीदकर बसना चाहती हैं। मिरेकल आफ लव नाम से बाबा पर पुस्तक लिखने वाले रिचर्ड एलपर्ट ने जिसमें बाबा के चमत्कारों का विस्तार से वर्णन है।

वृंदावन में बाबा ने ली समाधि

नीब करौरी महराज का जन्म उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद जिले के गांव अकबरपुर में हुआ था। बचपन में उनका नाम लक्ष्मी नारायण शर्मा था। बाबा जहां भी जाते यज्ञ व भंडारा कराते। उन्होंने तमाम हनुमान मंदिर स्थापित कराए। निर्वाण से पूर्व दो आश्रम भी बनवाए। पहला आश्रम कैंची (नैनीताल) तो दूसरा वृंदावन (मथुरा) में। बाबा ने महासमाधि के लिए वृंदावन को चुना। नौ सितंबर 1973 को नीम करौली महाराज ने कैंची से आगरा के लिए प्रस्थान किया। यह उनकी कैंची की अंतिम यात्रा थी। वह इसका संकेत भी दे गए। 10 सितंबर को आगरा से वृंदावन रवाना हुए, जहां 11 सितंबर को महासमाधि ली।

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