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दून मेडिकल कॉलेज को ई-हॉस्पिटल बनाने में सॉफ्टवेयर का अड़ंगा

देहरादून, दून मेडिकल कॉलेज अस्पताल को ई-हॉस्पिटल बनने की राह में सॉफ्टवेयर का रोड़ा बन गया है। जिस सॉफ्टवेयर कंपनी ने इसका सॉफ्टवेयर इंस्टॉल करना है, उसका बकाया न मिलने से काम आगे नहीं बढ़ पा रहा है।

ऐसे में इस काम के लिए मिले 20 कम्प्यूटर व अन्य उपकरण भी धूल फांक रहे हैं।दून मेडिकल कॉलेज अस्पताल में लगने वाली लंबी कतारों से मरीजों को फिलहाल राहत नहीं मिलने वाली है।

दून हॉस्पिटल को ई-हॉस्पिटल बनाने के लिए एनएचएम की ओर से कम्प्यूटर और अन्य उपकरण तो मिल गए, लेकिन सॉफ्टवेयर नहीं मिल रहा है।

जिस वजह से ई-हॉस्पिटल का काम अटक गया है। दिल्ली की कंपनी सिल्वर टेक द्वारा सॉफ्टवेयर इंस्टॉल करना है, जिसके इंस्टॉल होते ही एक क्लिक पर सारा काम शुरू हो जाएगा।

लेकिन बजट न मिलने से ई-हॉस्पिटल की प्रक्रिया लटक गई है। कंपनी का करीब ढाई लाख से ऊपर का बकाया बताया जा रहा है। हालाकि अधिकारी यह दावा कर रहे हैं कि जल्द इस मामले का समाधान तलाश लिया जाएगा।

ई-हॉस्पिटल के लिए अस्पताल को 20 नए कम्प्यूटर मिल चुके हैं। ई-हॉस्पिटल में दून हॉस्पिटल की सारी सुविधाएं जिसमें पैथोलॉजी, रेडियोलॉजी और ओपीडी, आइपीडी आदि का स्टेटस ऑनलाइन अपडेट होगा।

इस पूरे सिस्टम को दो चरण में पूरा किया जाएगा। सबसे पहले मरीज को एक यूनीक आइडी दी जाएगी, जो पूरे देश में मान्य होगी।

इस आइडी के जरिये मरीज दून अस्पताल की सारी सुविधाओं को घर से चेक कर अपना रजिस्ट्रेशन कर सकेंगे। इसके अलावा पैथोलॉजी और रेडियोलॉजी विभाग की रिपोर्ट का स्टेटस और भुगतान भी घर से ही कर सकेंगे।

ई-हॉस्पिटल के जरिये दून हॉस्पिटल में इलाज कराने के लिए घर बैठे ही ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन करा सकेंगे। इसके जरिये मरीज को किस चिकित्सक को कब और कहा दिखाना है, ये भी जानकारी मिल जाएगी। उनका अपॉइंटमेंट ऑनलाइन मिल जाएगा।

इसके साथ ही ई-हॉस्पिटल के जरिये मरीज की ओपीडी पर्ची और यूनिक आइडी बना दी जाएगी। जिससे से मरीज की बीमारी और इलाज अपडेट हो जाएगा।

जिसको दूसरे अस्पताल में जाकर भी दिखाकर इलाज कराया जा सकेगा। अस्पताल की पैथोलॉजी विभाग में कराए गए टेस्ट की रिपोर्ट भी ऑनलाइन मिल जाएगी। इसके बाद अस्पताल के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। इन सब सुविधाओं के शुरू होने से अस्पताल में मरीजों को लंबी-लंबी कतारों से निजात मिल पाएगी।

डॉ. आशुतोष सयाना (प्राचार्य दून मेडिकल कॉलेज) का कहना है कि वर्तमान में अस्पताल में तीन जगह रजिस्ट्रेशन हो रहे हैं। पहला मुख्य परिसर, दूसरा महिला अस्पताल और तीसरा नए ओपीडी ब्लॉक में। इस व्यवस्था को एकीकृत किया जाना है। इसके अलावा कई अन्य सुविधाएं भी एकीकृत होनी हैं। ऐसे में यह जरूरी है कि ई-हॉस्पिटल योजना को अमलीजामा पहनाने से पहले चीजें व्यवस्थित हो जाएं। इसके अलावा सभी राजकीय मेडिकल कॉलेजों का एकल सॉफ्टवेयर भी बनना है।

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