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समाज कल्याण विभाग ने मृतकों को भी बांट दी पेंशन

देहरादून, समाज कल्याण विभाग में करोड़ों रुपये के छात्रवृत्ति घोटाले की आंच अभी कम भी नहीं हुई कि विभाग में एक और गड़बड़झाला सामने आया है। इस मर्तबा मामला बुजुर्गों को दी जाने वाली वृद्धावस्था पेंशन योजना से जुड़ा है।

इसमें न सिर्फ नियमों को ताक पर रखकर अपात्रों को पेंशन दी गई, बल्कि मृतकों को भी 10.35 लाख रुपये की पेंशन बांट दी गई। विधानसभा के पटल पर रखी गई भारत के नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक (कैग) की रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ है। कैग ने वृद्धावस्था पेंशन से जुड़े सभी मामलों की जांच की सरकार से सिफारिश की है।

राज्य में वर्ष 2015-16 से 2017-18 तक की अवधि में वृद्धावस्था पेंशन से जुड़े मामलों की कैग ने लेखा परीक्षा की। रिपोर्ट में उल्लेख है कि वृद्धजनों को पेंशन देने को तय दिशानिर्देशों व नियमों की अनदेखी हुई है।

वृद्धावस्था पेंशन के लाभार्थियों की चयन प्रक्रिया कमियों से भरी थी। डेटाबेस में इनपुट व वैलिडेशन कंट्रोल की कमी के कारण बड़ी संख्या में भुगतान के प्रकरण लंबित थे।

चौंकाने वाली बात यह है कि मृतकों को भी पेंशन जारी हुई। चंपावत, पिथौरागढ़, ऊधमसिंहनगर जिलों के सर्वे का हवाला देते हुए रिपोर्ट में उल्लेख है कि 74 लाभार्थियों की मृत्यु के बारे में विभाग को सूचना नहीं थी। इनके जीवन प्रमाणपत्र की पुष्टि भी विभाग ने नहीं की।

इन पेंशनरों की मृत्यु के बाद 78 माह तक पेंशन इनके बैंक खातों में जमा की गई। ये रकम 10.35 लाख रुपये है। ये भी पाया गया कि चार मृतकों के बैंक खातों से उनकी मृत्यु के बाद भी धनराशि निकाली गई। पेंशन डेटाबेस के सत्यापन में पता चला कि देहरादून, चंपावत में 614 प्रकरणों में 17.08 लाख का अधिक भुगतान हुआ।

रिपोर्ट के अनुसार सरकार ने पूर्व में निर्देश जारी किए थे जहां पति व पत्नी दोनों ही पेंशन को पात्र होंगे, वहां केवल एक को ही पेंशन स्वीकृत होगी और इसमें महिलाओं को प्राथमिकता मिलेगी। बावजूद इसके 2007-08 से 2017-18 के बीच 1147 मामलों में पति-पत्नी दोनों को पेंशन स्वीकृत कर मार्च 2018 तक भुगतान हुआ। इस प्रकार 4.18 करोड़ का अनियमित भुगतान किया गया।

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