Home कुमायूं नैनीताल वन प्रभाग में तस्‍करों को खौफ नहीं

नैनीताल वन प्रभाग में तस्‍करों को खौफ नहीं

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नैनीताल : वन अधिनियम 1980 के सख्त प्रावधान आम आदमी को सीमेंट के मकान बनाने के लिए मजबूर कर दिए हैं। बावजूद इसके वन अधिनियम के साथ ही अन्य कानूनों का खौफ तस्करों को प्राकृतिक संपदा के अवैध दोहन से नहीं रोक पा रहा है। वन महकमा वनों के अवैध कटान व पातन पर पूरी तरह अंकुश लगाने में असफल रहा है। जुर्माना वसूलने व केसों की पैरवी में ढिलाई से तस्करों को अघोषित मदद मिल रही है।

मुख्य वन संरक्षक कुमाऊं को भेजी गई रिपोर्ट के अनुसार नैनीताल वन प्रभाग में अप्रैल से दिसंबर 2019 तक वन अपराध से संबंधित 96 मामले सामने आए। अवैध तरीके से 60 पेड़ व 36 टहनियां काट दी गईं। इसमें वृक्षों का आयतन करीब 20 घनमीटर था। इनकी कीमत करीब सवा लाख आंकी गई है।रिपोर्ट के अनुसार कुल 96 मामलों में से अवैध कटान के 20, नियमों की अवहेलना से संबंधित पांच, अवैध खनन से संंबंधित 12, वन्य जीव संरक्षण अधिनियम से संबंधित चार तथा अन्य 55 मामले हैं।

अदालत में लंबित हैं मुकदमे

नैनीताल वन प्रभाग के अंतर्गत इन माहों के तहत दर्ज तमाम मुकदमे अदालत में लंबित हैं। तीन केस एक साल से, चार केस दो साल से जबकि छह केस दो साल से अधिक समय से अदालत में विचाराधीन हैं।

अवैध निर्माण में चढ़ा रहे बलि

नैनीताल में व्यावसायिक व अन्य निर्माण पर भले ही पाबंदी हो मगर शहर में रसूखदार निर्माण के बहाने पेड़ों की बलि चढ़ा रहे हैं। रसूखदार वन विभाग को जुर्माना अदा कर निर्माण की बाधा हमेशा के लिए दूर कर रहे हैं। डीएफओ बीजूलाल टीआर का कहना है कि नैनीताल वन प्रभाग में अवैध कटान सख्ती से रोका जा रहा है। जुर्माना भी अधिकतम वसूला जा रहा है। तस्करों पर निगहबानी के लिए लगातार गश्त की जा रही है।

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