रुद्रप्रयाग

जल संरक्षण की मुहिम में जुटे किमाणा गांव के युवक

रुद्रप्रयाग : जल संरक्षण मिशन के तहत बरसात का पानी एकत्रित करने के लिए किमाणा गांव के युवा 50 नाली खाली भूमि पर 40 चालखाल व खंतियों का निर्माण कर अनूठी पहल कर रहे है। इसके साथ ही विभिन्न प्रजातियों के पौधों का रोपण भी कर रहे है। वर्षा का पानी एकत्रित होने से जहां प्राकृतिक जल स्रोत रिचार्ज होंगे, वहीं जल संचय जीवन संचय की कहावत को साकार किया जा सकेगा।

ऊखीमठ ब्लॉक के किमाणा गांव के पर्यावरण प्रेमी डॉ. कैलाश पुष्पान के नेतृत्व में क्षेत्रीय युवा जंगल में चालखाल व खंतियों का निर्माण कर कर रहे हैं। जल संरक्षण को लेकर क्षेत्रीय युवाओं में खासा उत्साह दिख रहा है। क्षेत्रीय युवक आयुश, अमन, अतुल, आकाश, सौरभ, राहुल, रोहित के साथ ही प्रदीप पुष्पवान ने किमाणा गांव के प्योख नामक तोक में खाली पड़ी पचास नाली भूमि पर 150 रिचार्ज पिट व 40 चालखाल व खंतियों का निर्माण किया है। प्रत्येक खंति ढ़ाई मीटर लंबी व 30 सेमी चौड़ी व गहरी है। इन खंतियों में औसतन एक हजार लीटर जल भंडारण की क्षमता है। इसके अलावा इनकी खंतियों की मेंड पर बांज, कचनार, भीमल और आंवला समेत विभिन्न प्रकार के पौधों का रोपण भी किया। जिससे यह पौधे पानी को रोकने में अहम भूमिका निभाएंगे.

डॉ. कैलाश पुष्पवान ने बताया कि युवकों को जल संरक्षण व जल संवर्धन के लिए जागरूक कर पानी बचाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। बताया कि गर्मी के मौसम में क्षेत्र के आसपास के जल स्रोतों में पानी की मात्रा काफी कम हो जाती है, जिससे पानी का संकट खड़ा हो जाता है। जंगलों में चालखाल बनाने का मकसद एक और जहां पानी के स्रोत पूरे वर्ष रिचार्ज रहेंगे, वहीं बरसात के दौरान खंतियों में पानी एकत्रित होने पर जंगली जानवरों को भी जंगल में पानी मिलेगा।