रुद्रप्रयाग

वैदिक मंत्रोच्चार के साथ खुले भगवान तुंगनाथ के कपाट, नहीं सुनाई दिये पैराणिक जागर

रुद्रप्रयाग: पंच केदारों में तृतीय केदार के नाम से विख्यात भगवान तुंगनाथ के कपाट बुधवार को 11:30 बजे वैदिक मंत्रोच्चार के साथ खोल दिये गये. लॉकडाउन और कोरोना के कारण कपाट खुलने के समय मंदिर परिसर में कुछ ही लोग मौजूद रहे. जिनमें देवस्थानम बोर्ड के अधिकारी, कर्मचारी व तीर्थ पुरोहित शामिल थे. भगवान तुंगनाथ यात्रा के आधार शिविर चोपता में बह्मबेला पर पंडितों ने पूजन कर तैतीस करोड़ देवी-देवताओं का आह्वान किया. जिसके बाद तुंगनाथ की चल विग्रह उत्सव मूर्तियों का रुद्राभिषेक कर आरती उतारी गई. जिसके बाद विग्रह उत्सव मूर्तियों को डोली में वैदिक मंत्रोंच्चार के साथ श्रृंगार किया गया. ठीक आठ बजे तुंगनाथ की डोली चोपता से धाम के लिए रवाना हुई.

सुरम्य मखमली बुग्यालों में नृत्य करते हुए बाबा की डोली भुजगलि पहुंची. जिसके बाद डोली ने देव दर्शनी में विश्राम किया. वाद्य यंत्रों की धुनों पर भक्तों से साथ नाचते हुए डोली भगवान तुंगनाथ के मुख्य मन्दिर पहुंची. भगवान तुंगनाथ की चल-विग्रह उत्सव डोली के मन्दिर परिसर में प्रवेश करते ही भगवान तुंगनाथ के कपाट वैदिक मंत्रोंच्चार के साथ खोले गये. कपाट खुलने के मौके पर मंदिर को दस कुंतल फूलों से सजाया गया.

कपाट खुलने के बाद भगवान तुंगनाथ के स्वयं भू लिंग से भस्मी, चन्दन, व पुष्पों को श्रद्धालुओं को प्रसाद स्वरूप वितरित किया गया. कपाट खुलने के बाद तहसील प्रशासन के निर्देश के अनुसार पांच हक-हकूकधारी व तीन देवस्थानम बोर्ड के अधिकारी, कर्मचारी तुंगनाथ धाम में मौजूद रहेंगे.

नहीं सुनाई दिये पौराणिक जागर
पिछले कई सालों से भगवान तुंगनाथ की चल-विग्रह उत्सव डोली का स्वागत विभिन्न गांवों की महिलाओं के जागर से होता है, मगर इस बार लॉकडाउन के कारण ऐसा नहीं हो पाया.