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आरटीई से वंचित छात्रों को हर माह मिलेंगे दो हजार रुपये

देहरादून,ऋषिकेश में कई लोगों ने फर्जी प्रमाण पत्र लगाकर आरटीई के तहत अपने बच्चों को स्कूलों में प्रवेश दिला दिया था। जांच में इसकी पुष्टि होने पर उत्तराखंड बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने स्कूलों से ऐसे लोगों से पूरी फीस वसूलने को कहा।

साथ ही आरटीई का लाभ पाने से वंचित रह गए पात्र छात्र-छात्राओं का नए सत्र में दोबारा आवेदन कराने का आदेश दिया। इसके अलावा उक्त छात्रों को आयोग की स्पांसरसिप योजना के तहत मासिक दो हजार रुपये भी दिए जाएंगे। इसके लिए छात्रों को आवेदन करना होगा।

उत्तराखंड बाल अधिकार संरक्षण आयोग में बुधवार को अध्यक्ष ऊषा नेगी ने आरटीई और स्कूलों से संबंधित विभिन्न मामलों की सुनवाई की। इस दौरान एक व्यक्ति ने देहरादून के द दून स्कूल में बच्चे को प्रवेश न दिए जाने की शिकायत की।

इस पर स्कूल की सहायक निदेशक अनुपमा ने सचिव शिक्षा उत्तराखंड की ओर से जारी पत्र का हवाला देते हुए निजी स्कूलों को आरटीई के अंर्तगत मान्यता लेने की जरूरत न होने और सूचना के अधिकार से बाहर होने की बात कही।

दूसरे मामले में सेंट जॉर्ज स्कूल की प्रधानाचार्य ने आयोग अध्यक्ष के निर्देश पर निष्कासित छात्र की फीस वापस करने का आश्वासन दिया। वहीं, हरिहरानंद पब्लिक स्कूल हरिद्वार के प्रधानाचार्य और प्रबंधन समिति के सचिव ने शुल्क वृद्धि के मामले में पक्ष रखा। इस पर अध्यक्ष ने आपत्ति जताते हुए अन्य मदों में शुल्क समाप्त करने के आदेश दिए।

एक अन्य मामले में क्लेमेनटाउन थाने के उपनिरीक्षक को पॉक्सो का मुकदमा न दर्ज करने पर तलब किया गया। उपनिरीक्षक ने दोबारा मामले की जांच कर 15 दिन के भीतर आयोग अध्यक्ष को रिपोर्ट उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया।

आयोग की अध्यक्ष ने इस पर आपत्ति जताते हुए कहा कि सचिव शिक्षा ने विधानसभा के समक्ष 75 स्कूलों की सूची जारी की है, जिन्हें राज्य सरकार से मान्यता नहीं है। ऐसे में द दून स्कूल के लिए किस प्रकार यह पत्र निर्गत किया गया। इस संबंध में आयोग शिक्षा सचिव को पत्र लिखेगा।

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