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तकनीकी खराबी की शिकायतों पर रोडवेज ने नई बसों का संचालन रोका

देहरादून, राज्य परिवहन निगम में टाटा कंपनी से खरीदी गई 150 नई बसों में तकनीकी खराबी की शिकायतों के मद्देनजर निगम मुख्यालय ने इन सभी बसों के संचालन पर रोक लगा दी है।

निगम के प्रबंध निदेशक रणवीर चौहान ने बसों की थर्ड पार्टी तकनीकी जांच सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ रोड सेफ्टी दिल्ली से कराने के आदेश दिए हैं। इनमें 125 बसें पंजीकृत होने के बाद मार्गों पर दौड़ रही थीं, जबकि 25 बसों के पंजीकरण की प्रक्रिया चल रही थी।

प्रबंध निदेशक ने पंजीकरण प्रक्रिया भी रोक दी है। जो बसें रूट पर थीं उन्हें वापस आने पर डिपो में खड़ी करने के लिए कहा गया है। बसों के गियर लीवर के टूटने की लगातार शिकायतें आ रहीं थीं। बुधवार को कुमाऊं मंडल में ऐसे ही मामले में एक बस गियर लीवर टूटने के कारण खाई में पलटने से बाल-बाल बच गई।

आयु सीमा पूरी कर चुकी बसों को बाहर करने के लिए परिवहन निगम ने छह महीने पूर्व 300 नई बसों के आर्डर दिए थे। इनमें पर्वतीय मार्गों के लिए 150 छोटी बसें टाटा कंपनी को आर्डर की गईं, जबकि मैदानों के लिए 150 बड़ी बसें अशोका लेलैंड कंपनी को।

टाटा कंपनी ने दीपावली से पूर्व अपनी 150 बसों की डिलीवरी दे दी थी। अशोका लेलैंड से बसें अभी नहीं मिली हैं। इनमें से 125 बसें पंजीकरण के बाद रूट पर दौड़ने लगीं, जबकि 25 बसों के पंजीकरण संबंधी प्रक्रिया चल रही थी। रूट पर उतरते ही इन बसों में तकनीकी खराबी आने लगी।

बसों में ओल्ड मॉडल वाले लंबी रॉड वाले गियर लीवर लगे हैं जो गुणवत्ता में खराब निकले। सबसे ज्यादा शिकायतें बसों के गियर लीवर टूटने की हैं। एक बस का लीवर डेढ़ हजार किमी चलकर टूट गया, जबकि दूसरी बस का साढ़े तीन हजार किमी पर।

एक बस में यह दस हजार किमी पर टूट गया। नई बसों के गियर लीवर में खराबी के बाद निगम के द्वारा सभी बसों के गियर लीवर बदलने का फैसला लिया गया था। इसके बाद बसों में दूसरे फॉल्ट भी आने लगे। हादसों के खौफ से रोडवेज के प्रबंध निदेशक रणवीर चौहान ने नई बसों का संचालन तत्काल प्रभाव से रोकने के आदेश दे दिए। प्रबंध निदेशक की ओर से टाटा कंपनी को पत्र भेजकर भविष्य के लिए बसों की आपूर्ति फिलहाल रोकने को कहा गया है।

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