राष्ट्रीय

जरूरत पड़ी तो पूर्वी लद्दाख में सेना की तैनाती बढ़ाने को हैं तैयार-IAF चीफ

वायुसेना के प्रमुख एयर चीफ मार्शल विवेक राम चौधरी (Vivek ram chaudhari) ने आज शनिवार को कहा कि पूर्वी लद्दाख में भारतीय वायुसेना (Indian Air Force) अपनी तैनाती जारी रखे हुए है क्योंकि चीन के साथ गतिरोध अभी भी बना हुआ है और जरूरत पड़ने पर बल सैनिकों की उपस्थिति बढ़ाने के लिए तैयार है.

उन्होंने हैदराबाद के पास डुंडीगल स्थित वायुसेना अकादमी में एक संयुक्त स्नातक परेड से इतर संवाददाताओं से कहा, ‘जैसा आपने कहा, गतिरोध जारी है. पूर्वी लद्दाख (Eastern Ladakh) के कुछ इलाकों से सैनिक (दोनों तरफ के) पीछे हटे हैं. लेकिन, सैनिक पूरी तरह से अभी तक नहीं हटे हैं. मैं विस्तार में नहीं जाना चाहूंगा, लेकिन यह कहना पर्याप्त है कि हम तैनात हैं, हम उस क्षेत्र में हमारे सामने आ सकने वाली किसी भी चुनौती से त्वरित रूप से निपटने के लिए तैयार हैं.’

गलवान घाटी में दोनों ओर से सुरक्षा बलों की भारी तैनाती

एयर चीफ मार्शल विवेक राम चौधरी पूर्वी लद्दाख क्षेत्र में चीन के साथ गतिरोध पर एक सवाल का जवाब दे रहे थे. उन्होंने कहा कि गलवान घाटी (Galwan Valley) में हुई झड़प के बाद क्षेत्र में सुरक्षा बलों की तैनाती के संबंध में पिछले अप्रैल की तरह ही यथास्थिति जारी है.

यह पूछे जाने पर कि क्या बलों की और तैनाती की जाएगी, उन्होंने कहा, ‘नि:संदेह, यदि आवश्यक हुआ तो वहां यह होगा. जरूरत पड़ने पर हम तैनाती बढ़ाएंगे.’ चौधरी ने एक अन्य प्रश्न के जवाब में कहा कि भारतीय वायुसेना पड़ोसी देश से विभिन्न स्वरूपों में आने वाले खतरों से अवगत है.

विदेश मंत्री एस जयशंकर ने एक दिन पहले शुक्रवार को कहा था कि गतिरोध चीन द्वारा ‘समझौतों’ का पालन नहीं करने और बीजिंग के एक ऐसे पक्ष के रूप में काम करने का परिणाम है जिसने ‘एक अनुबंध का उल्लंघन किया है.’

इस बीच एक बार फिर भारत और चीन के साथ सीमा पर तनाव की स्थिति बनती दिख रही है. चीन की सीमा से सटे अरुणाचल प्रदेश में 15,200 फीट की ऊंचाई पर आमने-सामने भारत और चीन की सेनाएं आमने-सामने हैं. खबर है कि दोनों तरफ सैनिकों की भारी तैनाती की गई है.

चीन हमारे साथ ‘सलामी-स्लाइसिंग’ का खेल खेल रहाः विशेषज्ञ

भारत और चीन के बीच बर्फ से ढकी सीमाओं में से एक बुमला दर्रा (Bumla Pass) जिसे सामरिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण क्षेत्र माना जाता है. भारत की सीमा चौकी को चिह्नित करने वाली झोपड़ियां चीनी चौकियों से कुछ ही मिनटों की पैदल दूरी पर हैं, जहां चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी के सैनिक बर्फ से ढके हुए क्षेत्र को नियंत्रित कर रहे हैं.

दूसरी ओर, इंजीनियरिंग सेवा के पूर्व महानिदेशक और भारत-चीन सीमा पर विशेषज्ञ लेफ्टिनेंट जनरल उत्पल भट्टाचार्य (रिटायर) ने बताया, ‘चीनी हमारे साथ ‘सलामी-स्लाइसिंग’ का खेल खेल रहे हैं – लद्दाख में घुसपैठ, अरुणाचल प्रदेश में वास्तविक नियंत्रण रेखा के पास किलबंद गांव और सीमा तक नई सड़कें.’ सलामी स्लाइसिंग उन छोटे उकसावों के इस्तेमाल को कहा जाता है, जिनमें से कोई भी अपने आप में युद्ध को भड़काने वाली गतिविधि नहीं होती है.

Leave a Response