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रिवर ट्रेनिंग व चैनलाइजेशन में खनन पट्टों के लिए मची मारामारी

कोटद्वार: राजस्व क्षेत्र में पड़ने वाली कोटद्वार भाबर की प्रमुख नदियों खोह और सुखरो में रिवर ट्रेनिंग और चैनलाइजेशन के पट्टे आवंटन के लिए जिला और तहसील प्रशासन ने पूरी तैयारी कर ली है। तहसील के इन पांच पट्टों को हासिल करने के लिए खनन कारोबारियों में मारामारी मची है। बृहस्पतिवार को इन पांच पट्टों के आवंटन के लिए प्रशासन की ओर से खुली नीलामी के लिए बोली लगाई जाएगी।

तहसील और जिला प्रशासन की ओर से सुखरो में एक और खोह नदी में चार कुल मिलाकर पांच स्थानों पर रिवर ट्रेनिंग और चैनलाइजेशन के लिए पट्टा आवंटन करने की तैयारी पूरी कर ली गई है। बृहस्पतिवार को तहसील के सभागार में इसके लिए खुली नीलामी प्रक्रिया अपनाई जा रही है। सर्वाधिक बोली लगाने वाले को ही इन नदियों में पट्टे आवंटित किए जाएंगे। कोटद्वार की इन दो नदियों में रिवर ट्रेनिंग और चैनलाइजेशन के पट्टे हासिल करने के लिए चार से पांच सौ लोगों ने दस्तावेज तैयार किए हैं। नीलामी में भाग लेने के लिए जिला खनन अधिकारी की ओर से अनापत्ति प्रमाणपत्र और एनओसी मांगी गई है। सूत्रों की मानें तो कोटद्वार, लैंसडौन और यमकेश्वर के लिए करीब आठ सौ लोगों ने खुली नीलामी में भाग लेने के लिए एनओसी हासिल की है।

तहसील प्रशासन की ओर से खोह और सुखरो के अलावा इस बार ग्वालगढ़ गदेरे और सिगड्डी स्रोत नदी में भी एक-एक स्थल रिवर ट्रेनिंग के लिए चयनित किए गए थे, लेकिन ग्वालगढ़ और सिगड्डी स्रोत में आरबीएम ढुलान के लिए वाहनों की आवाजाही को रास्ता देने के लिए लैंसडौन वन प्रभाग की ओर से आपत्ति जता दी गई है। सिगड्डी स्रोत में वन विभाग की ओर से राजाजी नेशनल पार्क के बफर जोन से निकटता का भी हवाला दिया गया है।

एसडीएम योगेश मेहरा ने बताया कि रिवर ट्रेनिंग और चैनेलाइजेशन के नियमों और शर्तों में इस बार काफी बदलाव किए गए हैं। उपखनिज परिवहन में प्रयुक्त वाहन (डंपर, ट्रैक्टर-ट्राली) निर्धारित रूट से ही नदियों में आवाजाही कर सकेंगे। रिवर ट्रेनिंग और चैनेलाइजेशन के सर्वे में ही रूट भी निर्धारित कर दिए गए हैं।

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