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बंदी के कगार पर पंहुचा जयहरीखाल का आवासीय विद्यालय

जहरीखाल. होनहार स्टूडेंट्स की प्रतिभा को निखारने के मकसद से लैंसडौन (Lansdowne) के पास जहरीखाल (Jailharikhal) में खोला गया राजीव गांधी अभिनव आवासीय विद्यालय (Rajeev Gandhi Abhinav Awasiya School) बंदी की कगार पर है. चार साल से ज्यादा समय बीत जाने के बावजूद छात्र-छात्राओं को न तो हॉस्टल सुविधा मिल पाई है और न हो प्रॉपर टीचर्स. ऐसे में बच्चे अब बीच में ही स्कूल छोड़ वापस घर लौटने को मजबूर हो रहे हैं. बेहद चिंताजनक बात यह है कि राज्य सरकार ने इससे पूरी तरह हाथ खींच लिए हैं.

न हॉस्टल है, न स्टाफ़

उत्तराखंड के चार ज़िलों में खोले गए राजीव गांधी अभिनव आवासीय विद्यालय भगवान भरोसे चल रहे हैं. पूर्ववर्ती हरीश रावत सरकार के कार्यकाल के दौरान कुमाऊं और गढ़वाल मंडल में खोले गए इन विद्यालयों में बच्चों को मुफ्त शिक्षा के साथ ही हॉस्टल की सुविधा दिए जाने प्रावधान था लेकिन चार साल में ही स्कूल के हालात बदहाल हो चुके हैं. स्कूलों में न तो प्रॉपर स्टाफ है और न ही बच्चों के लिए हॉस्टल की कोई सुविधा.

अच्छी पढ़ाई और अनुशासन की उम्मीद में स्कूल में एडमिशन ले चुके बच्चे और उनके मां-बाप अब परेशान हैं. स्कूल में पढ़ रहे 49 छात्र-छात्राओं में से कई आस-पास के इलाक़ों में किराए पर रह रहे हैं या बीच में ही स्कूल छोड़ने पर मजबूर हो रहे हैं.

सीएम ने किए हाथ खड़े

प्रशासन का कहना है कि अभिनव आवासीय स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों को जहरीखाल में बनने वाले आवासीय विद्यालय के हॉस्टल में शिफ्ट किए जाने का विचार है. इसके लिए एक एनजीओ से भी बातचीत चल रही है.

सबसे ज़्यादा चिंताजनक बात यह है कि इस स्कूल में पढ़ने वाली छात्राओं ने हाल ही में मुख्यमंत्री के जहरीखाल दौरे के दौरान जब स्कूल की चिंताजनक हालत के बारे में बताया तो मुख्यमंत्री ने हाथ खड़े कर दिए. मुख्यमंत्री ने साफ़ शब्दों में कह दिया कि उन्हें इस स्कूल के बारे में कुछ पता नहीं है. बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ के नारे का खोखलापन क्या आपको यहां नज़र नहीं आता.

 

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