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सीमांत क्षेत्रों से पलायन पर राजभवन ने आयोग से तलब की रिपोर्ट

देहरादून: चीन और नेपाल की सीमा से सटे उत्तराखंड के क्षेत्रों में पलायन की स्थिति को लेकर राजभवन ने उत्तराखंड ग्राम्य विकास एवं पलायन आयोग से रिपोर्ट तलब की है। पलायन की स्थिति पर वर्ष 2018 की अनंतिम रिपोर्ट के आधार आयोग यह ब्योरा भेज रहा है। यह रिपोर्ट बुधवार को राजभवन को उपलब्ध हो जाएगी।

उत्तराखंड के गांव निरंतर पलायन से जूझ रहे हैं। यह ऐसा विषय है, जो चिंता और चुनौती दोनों बढ़ा रहा है। राज्य गठन से लेकर अब तक 1702 गांव निर्जन हो चुके हैं, जबकि ऐसे गांवों की भी बड़ी संख्या है जहां आबादी अंगुलियों में गिनने लायक रह गई है। इस परिदृश्य के बीच अंतरराष्ट्रीय सीमा से सटे गांवों से पलायन को किसी भी दशा में उचित नहीं ठहराया जा सकता। इन गांवों के लोग सीमांत प्रहरी की भूमिका भी निभा रहे हैं। ऐसे में यह आवश्यक है कि सीमांत गांवों से पलायन को रोका जाए।

सूत्रों के अनुसार इस सबको देखते हुए राजभवन ने पलायन आयोग से रिपोर्ट तलब करते हुए पूरा ब्योरा उपलब्ध कराने को कहा। सूत्रों ने बताया कि आयोग ने इससे संबंधित रिपोर्ट तैयार कर ली है। इसमें वर्ष 2018 में आई आयोग की रिपोर्ट का हवाला देते हुए चीन व नेपाल की सीमा से सटे चार विकासखंडों भटवाड़ी (उत्तरकाशी), जोशीमठ (चमोली) और धारचूला व मुनस्यारी (पिथौरागढ़) के गांवों का संपूर्ण ब्योरा शामिल किया गया है। साथ ही सीमांत गांवों से पलायन थामने के लिए क्या-क्या कदम उठाए जा सकते हैं, इस बारे में सुझाव दिए गए हैं। यह भी बताया गया है कि आयोग अब फिर से राज्य में सर्वे कर रहा है।

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