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रेलवे विभाग के अफसर संजय अमन को मिला पहला स्मृति सम्मान

देहरादून: पूर्वा सांस्कृतिक मंच ने भारत के प्रथम राष्ट्रपति स्वर्गीय डॉ. राजेंद्र प्रसाद की जयंती सप्ताह का रविवार को भव्य कार्यक्रम के साथ समापन किया.

इस दौरान वक्ताओं ने राजेंद्र प्रसाद की जीवनी पर प्रकाश डालते हुए कहा कि डॉ. राजेंद्र प्रसाद राजनीति में सिद्धांत, नैतिकता और सुचिता के पक्षधर थे साथ ही भारत के संविधान निर्माण के दौरान संविधान सभा के अध्यक्ष थे. ऐसे में उनके इस योगदान को भुलाया नहीं जा सकता है.

दरअसल, राजेंद्र प्रसाद जयंती सप्ताह की शुरुआत बीते 3 दिसंबर को उनके जन्मदिवस से की गई, जिसमें रेलवे विभाग के कर्मचारियों के सहयोग से देहरादून रेलवे स्टेशन पर एक भव्य कार्यक्रम आयोजित किया गया.

इसी क्रम में रविवार 8 दिसंबर को जयंती सप्ताह का समापन एक भव्य कार्यक्रम के साथ किया गया. इस दौरान स्कूली छात्रों ने भी अपने विचार रखे.

वहीं कार्यक्रम में राजेंद्र प्रसाद स्मृति पुरस्कार देने की शुरुआत की गई. रेलवे विभाग के अधिकारी संजय अमन को पहला राजेंद्र प्रसाद समृति सम्मान से सम्मानित किया गया.

यह पुरस्कार किसी भी क्षेत्र में उन व्यक्तियों को दिया जाएगा जो डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद के जीवन मूल्यों में विश्वास रखते हों साथ ही अपने क्षेत्र में उन्हीं के जैसे नैतिकता और सुचिता के साथ जनता की सेवा कर रहे हों.

डॉ. राजेंद्र प्रसाद का जन्म 3 दिसंबर 1884 में बिहार के सीवान जिले के जीरादेई गांव में हुआ था. राजेंद्र प्रसाद भारत के पहले राष्ट्रपति थे. वे भारतीय स्वाधीनता आंदोलन के प्रमुख नेताओं में से एक थे.

उन्होंने भारतीय संविधान के निर्माण में भी अपना योगदान दिया था. साल 1934 में वे भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के मुंबई अधिवेशन में अध्यक्ष चुने गए. नेताजी सुभाषचंद्र बोस के अध्यक्ष पद से त्यागपत्र देने पर कांग्रेस अध्यक्ष का पदभार उन्होंने एक बार पुन: 1939 में संभाला था.

भारत में संविधान लागू होने के बाद उन्हें देश के पहले राष्ट्रपति का पदभार दिया गया. राष्ट्रपति के तौर पर उन्होंने कभी भी अपने संवैधानिक अधिकारों में प्रधानमंत्री या कांग्रेस को दखलअंदाजी का मौका नहीं दिया और हमेशा स्वतंत्र रूप से कार्य करते रहे.

राष्ट्रपति होने के अतिरिक्त उन्होंने स्वाधीन भारत में केंद्रीय मंत्री के रूप में भी कुछ समय के लिए काम किया था. पूरे देश में अत्यंत लोकप्रिय होने के चलते उन्हें राजेंद्र बाबू कहकर भी पुकारा जाता है.

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