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‘ड्रैगन’ से निपटने की तैयारी

उत्तरकाशी: भारत और चीन के बीच सीमा को लेकर बार-बार तनाव पैदा होता रहता है. जिसके कारण भारत सरकार अपनी सीमाएं मजबूत करने की दिशा में हर रोज नये काम कर रही है.

भारतीय सीमा पर सुरक्षा को लेकर उत्तराखंड बॉर्डर को बेहद संवेदनशील माना जाता है. इसके लिए भारतीय वायुसेना ने चिन्यालीसौड़ की हवाईपट्टी पर अभ्यास तेज कर दिया है. इसी कड़ी में भारतीय वायुसेना की टीम हेलीकॉप्टर से चिन्यालीसौड़ पहुंचा, जहां उन्होंने हवाई पट्टी और अन्य व्यवस्थाओं का जायजा लिया.

चिन्यालीसौड़ हवाई पट्टी को मजबूत एयरबेस बनाने के लिए भारतीय वायुसेना पिछले कई सालों से काम रही है. पिछले साल भी एयरफोर्स ने ‘गगन शक्ति’ नाम से हवाई पट्टी पर तीन दिवसीय अभ्यास किया था.

इसके बाद इस साल चिन्यालीसौड़ हवाई पट्टी पर 52 सीटर मल्टी परपज विमान की लैंडिंग करवाई गई. साथ ही डोनियर डीओ 228 विमान की भी इस पट्टी पर सफल लैंडिंग हुई. विंग कमांडर शुभम के नेतृत्व वाली टीम दो अलग-अलग मॉडल के मल्टीपरपज विमानों के साथ हवाई पट्टी पर उतरी.

भारत-चीन सीमा से सटी चिन्यालीसौड़ हवाई पट्टी राष्ट्रीय सुरक्षा के साथ ही आपदा के हालात में राहत बचाव अभियान चलाने के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण है.

ये हवाई पट्टी की दूरी भारत-तिब्बत अंतरराष्ट्रीय सीमा से करीब 125 किमी है. भारतीय वायु सेना लगातार इस हवाई पट्टी पर अपने विमानों व हेलीकॉप्टरों की ट्रायल लैंडिंग व टेक ऑफ का अभ्यास करती रहती है.

वहीं, भारतीय वायुसेना के प्रयोगों से यही लगता है कि वायुसेना इस हवाई पट्टी को एक महत्वपूर्ण एयरबेस बनाने की तैयारी में है. जिससे कि किसी भी युद्ध और आपातकालीन स्थिति में इसका प्रयोग किया जा सके. वायुसेना इस हवाई पट्टी पर लड़ाकू विमान के साथ ही मालवाहक विमानों की लैंडिंग भी करवा चुकी है.

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